BJP सांसद व विधायक में सीधी भिड़ंत ! मोतिहारी के रण में राधामोहन सिंह की बचेगी प्रतिष्ठा या पवन जायसवाल कर देंगे चारो खाने चित्त ? फैसला कल

BJP सांसद व विधायक में सीधी भिड़ंत ! मोतिहारी के रण में राधामोहन सिंह की बचेगी प्रतिष्ठा या पवन जायसवाल कर देंगे चारो खाने चित्त ? फैसला कल

MOTIHARI: मोतिहारी में बीजेपी के दो बड़े नेता आमने-सामने हैं। नगरपालिका चुनाव दोनों नेताओं के लिए अग्निपरीक्षा के समान है। इस कठिन परीक्षा को पास करने के लिए मोतिहारी के भीष्म पितामह कहे जाने वाले स्थानीय सांसद राधामोहन सिंह कैंप किये हुए हैं. दूसरी तरफ बीजेपी के ढाका से विधायक पवन जायसवाल मोर्चा संभाले हुए हैं. ल़ड़ाई भले ही नगरनिगम प्रत्याशियों के बीच हो, लेकिन प्रतिष्ठा बीजेपी सांसद और विधायक की जुड़ी हुई है। 

BJP के विधायक व सांसद आमने-सामने 

मोतिहारी की राजनीति में दो बड़े नेता आमने-सामने हैं. एक तरफ राधामोहन सिंह हैं तो दूसरी तरफ पवन जायसवाल। वैसे दोनों के बीच की लड़ाई कोई नई नहीं है। दोनों के बीच यह लड़ाई लंबे समय से जारी है. हाल के महीनों में जिला परिषद अध्यक्ष को लेकर फिर विधान परिषद चुनाव और अब नगरपालिका चुनाव में बीजेपी के सांसद व विधायक आमने-सामने खड़े हैं। राधामोहन सिंह ने अपने प्रत्याशी प्रकाश अस्थाना को जीताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं विधायक पवन जायसवाल ने प्रीति कुमार के पक्ष में जोरदार काम किया है। 

जीत-हार से भविष्य की राजनीति होगी तय 

जानकार बताते हैं कि राधामोहन सिंह और पवन जायसवाल के बीच राजनीतिक लड़ाई दो दशक से चली आ रही है। नगर निगम चुनाव  में एक ही दल के सांसद व विधायक की लड़ाई प्रतिष्ठा का विषय हो गया है। यह लड़ाई राधामोहन सिंह के घर यानि मोतिहारी में है। अगर भाजपा सांसद समर्थित प्रत्याशी की जीत होती है यह राधामोहन सिंह की जीत मानी जायेगी. अगर हार मिली तो सीधे तौर पर ठिकरा स्थानीय सांसद पर ही फुटेगा और सीधा लाभ बीजेपी विधायक पवन जायसवाल को मिलेगा। मोतिहारी नगर निगम मेयर व डिप्टी मेयर के चुनाव प्रचार में भी दोनों नेताओं ने एक दूसरे पर तंज कसा है। बिना नाम लिये दोनों ने एक दूसरे की हैसियत को नापा है। कल, 28 तारीख को चुनाव है. इस चुनाव में मोतिहारी के मतदाता तय करेंगे कि किस नेता में कितना दम है। मोतिहारी के रण में जीत-हार से राधामोहन सिंह के साथ-साथ पवन जायसवाल के भविष्य की भूमिका तय होगी.   

जिप अध्यक्ष-विप चुनाव में शह-मात का हो चुका है खेल  

बता दें, इसके पहले राधामोहन सिंह ने जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव व विधान परिषद चुुनाव में अंदर ही अंदर पवन जायसवाल के कैंडिडेट का विरोध किया था। नतीजा यह हुआ कि पवन जायसवाल की पत्नी से जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी छीन गई। वहीं विप चुनाव में भी बीजेपी कैंडिडेट की हार हो गई थी और निर्दलीय प्रत्याशी की जीत दर्ज हुई थी। तब राधामोहन सिंह को पूर्वी चंपारण जिले का भीष्म पितामह की संज्ञा दी गई थी। शहर में जगह-जगह पोस्टर लगे थे. जानकार बताते हैं कि इन दोनों चुनाव में राधामोहन सिंह गुट ने खुलकर विरोध किया था। अब ढाका से बीजेपी विधायक पवन जायसवाल स्थानीय सांसद के प्रत्याशी का जबरदस्त विरोध कर रहे हैं. 

 

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