मिसाल-बेमिसाल: एम्स के डॉक्टरों ने किया कुछ ऐसा किया कि श्रद्धा में झुक गये सिर, लावारिस मरीज की डेढ़ साल तक की अपने खर्च पर इलाज

मिसाल-बेमिसाल: एम्स के डॉक्टरों ने किया कुछ ऐसा किया कि श्रद्धा में झुक गये सिर, लावारिस मरीज की डेढ़ साल तक की अपने खर्च पर इलाज

पटना: डॉक्टर को ऐसे ही धरती के भगवान नहीं कहा जाता है। एम्स पटना के डॉक्टरों ने सेवा की जो मिसाल पेश की है, वह बेमिसाल है। एक मरीज को अपने खर्च पर अस्पताल में एडमिट करवाना, फिर उसका सारा खर्च उठाना। यह सब ऐसा जिसपर शायद ही विश्वास हो। लेकिन एम्स पटना के डॉक्टरों ने ऐसा ही कुछ अलग किया है। दरअसल करीब डेढ़ साल पहले एक मजदूर सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था और उसकी आवाज भी चली गई थी। इस लावारिस मरीज को एम्स में जब भर्ती कराया गया तो स्थिति काफी नाजुक थी। डेढ़ साल तक डॉक्टरों ने उसका इलाज किया। एम्स की तरफ से ही उसके खाने-पीने और रहने की सारी व्यवस्था की गई। धीरे-धीरे मरीज ठीक हुआ तो आवाज भी लौटने लगी। जब वह बोल पाने लगा तो डॉक्टरों ने उससे पता पूछ कर रविवार को आखिरकार उसके घर वालों से मिलवा ही दिया।

परिवार वालों ने छोड दिया था आस

ज्ञात हो कि मरीज भरत उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। एम्स पटना के डीन डॉ उमेश भदानी के अथक परिश्रम से जब भरत के पिता सुभाष मिस्त्री रविवार को पटना एम्स पहंचे तो उनकी आंखें भर आईं। बेटे को सीने से लगाया और भावुक हो उठे। डॉक्टरों से कहा- हम तो आस ही छोड़ चुके थे। आप लोगों ने इसे जीवन दान दिया है। भगवान को देखा नहीं है, लेकिन भगवान अगर होंगे तो आपके जैसे ही होंगे। पिता के साथ लौटने के वक्त मजदूर भरत को खुशी-खुशी जाते देख एम्स के डॉक्टर्स व नर्सिंग स्टाफ भी भावुक हो गए। 

बुरी तरह घायल था भरत

डॉ. उमेश भदानी बताते हैं, करीब डेढ़ वर्ष पूर्व पुलिस द्वारा भरत को एम्स के ट्रामा सेंटर में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। तब वह बुरी तरह घायल था। उसके ब्रेन में चोट लगी थी और वह कुछ बोल पाने में असमर्थ था। यहां के डॉक्टरों ने अपनी मेहनत से भरत को बचा लिया। वह अब पूरी तरह स्वस्थ हो गया है। जब भारत कुछ बातचीत करने की स्थिति में आया तब मैंने उसके घरवालों के बारे में पूछताछ की। तब भरत ने बताया कि वह बनारस के औरैया गांव का निवासी है और उसके पिता सुभाष मिस्त्री मजदूरी करते हैं। पता मिलते ही वहां के पुलिस स्टेशन से संपर्क साधकर उनके घर वालों को उनके बेटे के बारे में पूरी जानकारी भेजवाई। जानकारी मिलते ही उनके घरवाले यहां पहुंचे और भरत को घर ले गए। डॉक्टरों ने बताया कि लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व फुलवारीशरीफ के पास ही एक सड़क हादसे में कई मजदूरों की मौत हो गई थी। उसी में से एक भरत भी था, जो गंभीर हालत में सड़क किनारे पड़ा था। पुलिस ने उसे इलाज के लिए पटना एम्स में भर्ती कराया था। एम्स के डॉक्टर और नर्स अपने स्तर से इलाज, दवा, खाने और कपड़े की डेढ़ साल तक व्यवस्था करते रहे।


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