किसान आंदोलन : पांच सदस्यी कमेटी की केंद्र से वार्ता खत्म, आंदोलन पर फैसले को लेकर मीटिंग कर रहे हैं किसान नेता

किसान आंदोलन : पांच सदस्यी कमेटी की केंद्र से वार्ता खत्म, आंदोलन पर फैसले को लेकर मीटिंग कर रहे हैं किसान नेता

Desk. पिछले एक साल से चल रहे किसान आंदोलन पर आज अंतिम फैसला है. इसको लेकर पांच सदस्यी कमेटी की सरकार से वर्ता हो चुकी है. इस बीच किसान संगठन के नेता भी दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पहुंचे हैं. बता दें कि किसान की मांग पूरी करने के लिए केंद्र सरकार ने किसान संयुक्त मोर्चा व अन्य किसान संगठन को एक लिखित पत्र लिखा. इसमें एमएसपी पर कानून बनने के लिए कमेटी गठित करने और आंदोलन के दौरान किसान पर दर्ज केस वापस लेने सहित छह महत्वपुर्ण बाते थी.

किसान संगठन की  दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा आज अंतिम फैसला लेगा. मोर्चे की 5 मेंबरी हाईपावर कमेटी की सरकार से वार्ता खत्म हो चुकी है. इसके बाद सभी नेता मोर्चे की मीटिंग के लिए सिंघु बॉर्डर पहुंच गए हैं. जहां पर अभी सभी नेता अपने-अपने संगठनों के दूसरे नेताओं से बात कर रहे हैं. माना जा रहा है कि मोर्चे की मीटिंग में किसी तरह के आपसी मतभेद न दिखें, इसके लिए सभी को पहले सूचना दी जा रही है.

केंद्र की तरफ से किसान नेताओं से वार्ता में केस वापसी की हामी भर दी गई है. हालांकि इसमें अभी वही स्थिति है कि पहले आंदोलन खत्म होगा या फिर केस वापस होंगे. किसान नेता इस बात पर अड़े हुए हैं कि पहले केस वापस लिए जाएंगे, उसके बाद ही औपचारिक तौर पर आंदोलन खत्म करने की घोषणा होगी. केंद्र ने एमएसपी कमेटी में सिर्फ मोर्चे के नेताओं को रखने की बात भी मान ली है. दिल्ली बॉर्डर पर 377 दिन से किसान आंदोलन चल रहा है.

पंजाब के 32 में से अधिकांश किसान संगठन घर वापसी के लिए तैयार हैं. उनकी कृषि कानून वापसी की मुख्य मांग पूरी हो चुकी है. हालांकि, किसानों पर दर्ज केस को लेकर वह हरियाणा के साथ हैं. पंजाब में किसानों पर केस दर्ज नहीं किए गए, लेकिन हरियाणा में हजारों किसानों पर केस दर्ज हैं. हरियाणा के अलावा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ के अलावा दूसरे राज्यों और रेलवे के भी केस हैं. किसानों का कहना है कि अगर ऐसे ही घर आ गए तो आंदोलन वापसी के बाद केस भुगतने पड़ेंगे.

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