गैंगरेप मामले में पूर्व विधायक को आजीवन कारावास की सजा,कोर्ट के फैसले के बाद भेजे गए जेल

गैंगरेप मामले में पूर्व विधायक को आजीवन कारावास की सजा,कोर्ट के फैसले के बाद भेजे गए जेल

DESK : 13 साल के इंतजार के बाद गैंगरेप की शिकार एक युवती को कोर्ट से न्याय मिला है। जिसमें आरोपी बनाए गए यूपी के पूर्व विधायक योगेंद्र सागर को आजीवन कारवास और 30 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अदालत के फैसला दिए जाने के बाद पूर्व विधायक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और मेडिकल व कोविड टेस्ट कराकर जेल भेज दिया है।  वहीं मामले में अन्य आरोपियों को पहले ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।

2008 का है मामला

बदायूं जिले के बिल्सी कस्बे के एक व्यक्ति ने 23 अप्रैल 2008 को थाना पुलिस को सूचना दी थी कि उनकी बेटी नगर के एक डिग्री कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है। वह अपनी सहेली के घर नोट्स लेने गई थी। तब से उसका कुछ पता नहीं चल रहा है। थाना पुलिस ने न तो छात्रा को तलाश किया था और न ही उसकी गुमशुदगी दर्ज की। इस पर पिता ने एक मई 2008 को दोबारा पत्र दिया। इस पर पुलिस ने छात्रा की गुमशुदगी दर्ज की। चार मई को यह मामला अपहरण में तरमीम किया गया। 17 मई को पुलिस ने छात्रा को मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया गया।

जब परिवार वाले छात्रा से मिले तो उन्हें पता चला कि उसका अपहरण नीरज शर्मा उर्फ मीनू, तेजेंद्र सागर ने दो अज्ञात लोगों के साथ मिलकर किया था। बीए में पढ़नेवाली पीड़ित छात्रा ने आरोप लगाया था कि उसे नशा सुंघाकर लखनऊ में तत्कालीन बिल्सी के विधायक योगेंद्र सागर के लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर ले जाया गया। जहां कई दिन तक उसे नशा देकर रखा गया और उसके साथ विधायक योगेंद्र सागर, नीरज शर्मा और तेजेंद्र सागर ने सामूहिक दुष्कर्म किया। इतना ही नही लखनऊ के बाद दिल्ली आदि जगहों पर ले जाकर कई दिनों तक रेप किया

सात साल पहले दो आरोपियों को मिली उम्र कैद

 16 जुलाई 2014 को न्यायालय ने नीरज और तेजेंद्र सागर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी क्रम में शनिवार को न्यायाधीश अखिलेश कुमार ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी मदनलाल राजपूत, वकील अरविंद शर्मा और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद पूर्व विधायक योगेंद्र सागर को मुजरिम ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा का आदेश दिया है।

13 साल की लड़ाई के बाद मिला न्याय

पीड़ित छात्रा के भाई ने कहा न्याय पालिका पर पूरा भरोसा था। योगेंद्र सागर ने अत्याचार किया था उसकी उनको सजा मिली है। हालांकि, न्याय के लिए हमारे परिवार को 13 साल की लंबी न्यायिक लड़ाई लड़नी पड़ी है। अत्याचारी को सजा मिलने से मानसिक सुकून मिला है। कोर्ट के इस फैसले से लोगों का न्याय पालिका पर भरोसा बढ़ेगा।

कोर्ट की टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण

पूर्व विधायक को सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा ऐसे मामले में यदि उचित दंड नहीं दिया जाता है तो न्यायालय अपने पथ से भटक जाएगा। समाज व जनता का न्याय व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा। यदि न्यायालय पीड़ित पक्ष का संरक्षण नहीं करेगा तो ऐसी स्थिति में पीड़ित व्यक्ति स्वयं बदला लेने के मार्ग अपनाएगा और ऐसे मामलों में एक असहाय पीड़ित लड़की से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती है कि वह राजनीतिक पहुंच वाले लोगों के इस कृत्य का विरोध कर पाएगी। क्योंकि वह सामान्यता विरोध करने की स्थिति में नहीं हो सकती।


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