प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालों के लिए खुशखबरी, अब 5 साल की जगह इतने दिन में मिल जायेगी ग्रेच्यूटी की रकम

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालों के लिए खुशखबरी, अब 5 साल की जगह इतने दिन में मिल जायेगी ग्रेच्यूटी की रकम

News4nation desk : प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालों के जल्द ही केन्द्र सरकार से बड़ा तोहफा मिल सकता है. केंद्र सरकार देश के प्राइवेट सेक्‍टर में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए अच्‍छी पहल की दिशा में काम कर रही है. अगर श्रम पर संसद की स्‍थायी समिति की सिफारिशों को स्‍वीकार कर लिया जाता है तो निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को ग्रेच्‍युटी की रकम 5 साल के बजाय 1 साल पूरा करने पर ही मिलने लगेगी. 

श्रम पर संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ग्रेच्युटी भुगतान के लिए मौजूदा पांच साल की अवधि को घटाकर एक साल किया जाना चाहिए. बीजद सांसद भतृहरि महताब की अध्‍यक्षता वाली संसदीय समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि सोशल सिक्‍योरिटी कोड में न्‍यूनतम एक साल की अवधि पर सहमति बन सकती है. 

वहीं ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि पांच साल की समयसीमा पक्षपातपूर्ण है. इसे तत्‍काल खत्‍म किया जाना चाहिए. उन्‍होंने तर्क दिया कि अगर इम्‍प्‍लॉय स्‍टेट इंश्‍योरेंस कॉरपोरेशन (ESIC) एक महीने के सहयोग के बाद ही कर्मचारी को लाभार्थी के तौर पर स्‍वीकार करता है तो ग्रेच्‍युटी भुगतान में ये नियम क्‍यों लागू नहीं किया जा सकता.

दरअसल, भारत के श्रम बाजार में ज्यादातर कर्मचारी कम अवधि के लिए कार्यरत होते हैं. इसको देखते हुए ग्रेच्युटी पाने की समससीमा कम करने की मांग लगातार की जा रही थी. इसी को देखते हुए सरकार इसकी शर्तों में ढील देने और लागू करने के तरीके पर विचार कर रही है. केंद्र सरकार कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी भुगतान की समय सीमा को पांच साल से घटाकर एक से तीन साल के बीच करने पर विचार कर रही है.

गौरतलब है कि फिलहाल किसी कर्मचारी को कंपनी में काम की अवधि के आधार पर प्रति साल 15 दिन की सैलरी के आधार पर ग्रेच्युटी भुगतान किया जाता है. ये भुगतान कर्मचारी के किसी कंपनी में लगातार पांच साल पूरे करने पर ही मिलता है. अगर कर्मचारी 4 साल 11 महीने काम करने के बाद भी कंपनी छोड़ देता है या उसे निकाल दिया जाता है तो उसे ये भुगतान नहीं मिलता है.

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