हाय रे सुशासन! CM नीतीश जमीन के नाम पर सिर्फ 'कागज' बांटते हैं, शख्स ने मुख्यमंत्री की खोली 'पोल' तो हो गए शर्मिंदा

हाय रे सुशासन! CM नीतीश जमीन के नाम पर सिर्फ 'कागज' बांटते हैं, शख्स ने मुख्यमंत्री की खोली 'पोल' तो हो गए शर्मिंदा

PATNA: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जनता दरबार चल रहा है। सितंबर के दूसरे सोमवार को स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग समाज कल्याण विभाग, पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग, कल्याण विभाग, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, कला संस्कृति एवं युवा विभाग, वित्त विभाग श्रम संसाधन विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित मामलों की सुनवाई हो रही है। सीएम नीतीश लोगों की शिकायत सुन अधिकारियों को निर्देश दे रहे। जनता दरबार में आज मधुबनी के झंझारपुर से आये एक शख्स ने नीतीश कुमार के सामने ही उनकी पोल खोल दी।

हाय रे सुशासन की सरकार 

झंझारपुर के नरूआर गांव से आये एक शिकायतकर्ता ने कहा कि 2019 में बाढ़ में 52 परिवार विस्थापित हो गये थे। सारा जमीन-घर कमला नदी में समा गया था। तब आप (मुख्यमंत्री नीतीश कुमार) उस गांव में गए थे। शिकातकर्ता ने मुख्यमंत्री से कहा कि आपने ही सभी 52 परिवारों को घर के लिए जमीन का कागजात दिया था। 2019 से आज तक सिर्फ कागज मिला लेकिन जमीन नहीं। आज भी सभी 52 परिवार पन्नी टांग कर रह रहे हैं। मुख्यमंत्री की पोल खुलने के बाद नीतीश कुमार हरकत में आये। उन्होंने कहा कि हम आपके गांव में गये थे। मुझे याद है। इसके बाद सीएम नीतीश ने आपदा प्रबंधन विभाग को फोन कहा कि डीएम से बात करिए । अभी तक विस्थापित परिवारों को जमीन नहीं मिला है। हम वहां गये थे और जमीन देने की बात कही थी। लेकिन बता रहा कि अभी तक जमीन उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसको देख कर शिकायत दूर करिए। 


अरे भाई चार शिकायत आ गया

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आंगनबाड़ी सेविका बहाली का बड़े पैमाने पर शिकायत मिलने सीएम नीतीश भी परेशान हो गए। मधुबनी से लगातार चार शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग को अपर मुख्य सचिव को फोन लगाकार कहा- अरे भाई.....चार शिकायत पहुंच गया है। क्या हो रहा है इस मामले को देखिए,लगातार गड़बड़ी की शिकायत है। 

जनता दरबार में गर्माहट 

फरियादी ने सीएम नीतीश से कहा कि शिक्षा विभाग में भारी गड़बड़ी हो रही है। परीक्षा में धांधली की शिकायत लगातार की जा रही लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही। आप इसे अपने स्तर से देखिए। शिकायतकर्ता अपनी जिद पर अड़ा रहा। वह सीएम नीतीश के सामने खड़े होकर अपनी बात कहते रहा। इस दौरान मुख्यमंत्री गुस्से में आ गये। बस क्या था सुरक्षा गार्डस शिकायतकर्ता को कमर डाल हटाने लगे। यह देख सीएम नीतीश ने कहा कि छोड़ दीजिए। फिर उसे जबरन शिक्षा विभाग के पास भेजा गया। 

गुस्से में लाल सीएम नीतीश ने केस दर्ज करने को कहा

वहीं एक पीड़ित शख्स ने सीएम नीतीश से फरियाद किया कि उनका पुत्र व पुत्री की पानी में डूबने से मौत हो गई थी। मुआवजा के लिए पैसा भी आया लेकिन ऑफिस से कर्मी एक लाख रू की मांग कर रहे। यह शिकायत सुन सीएम नीतीश गुस्से से तमतमा गये। उन्होंने तुरंत कहा कि जिसने पैसे की मांग किया है उस पर केस दर्ज होगा। मुख्यमंत्री ने तुरंत आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव को फोन कर रहा कि पूरी जानकारी लेकर जिसने भी पैसे की मांग किया है उस पर केस दर्ज करें। 

CM नीतीश से सख्त लहजे में पूछा....

 एक युवक ने सीएम नीतीश से कहा कि पॉलिटेक्निक-डिप्लोमा में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना लागू है तो फिर बिहार बीएड में इस योजना को क्यों नहीं लागू किया गया है? इस पर सीएम नीतीश ने कहा कि यह तो तय किया हुआ है किसको मिलता है। इस पर छात्र ने कहा कि आपको इस बात की शंका है कि बीएड कर लेंगे तो आप उन्हें नौकरी नहीं दे पायेंगे। जब नौकरी ही नहीं मिलेगी तो छात्र कर्ज नहीं चुका पायेगा। इसीलिए आप बिहार बीएड वालों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की लाभ नहीं दे रहे। यह सुविधा हमलोगों की दी जाए। इस पर मुख्यमंत्री उस युवक को शिक्षा विभाग के पास भेज दिया। 

सीएम नीतीश से कई बच्चों ने शिकायत किया कि 2017 में ही मैट्रिक पास किये लेकिन आज तक प्रोत्साहन राशि नहीं मिली। इस पर मुख्यमंत्री ने शिक्षा मंत्री को देखने को कहा। वहीं एक विकलांग व्हील चेयर पर आकर मुख्यमंत्री से कहा कि हुजूर आज तक आयुष्मान हेल्थ कार्ड नहीं मिला। इस पर मुख्यमंत्री ने आश्चर्य जताया और तुरंत स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक निर्देश दिया।

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