ब्लैक फंगस पर सरकार के दावे की पोल खोल दी वरिष्ठ समाजवादी नेता बीनू यादव ने, कहा...सिस्टम की संवेदनहीनता से मरीजों की स्थिति और रही गंभीर

ब्लैक फंगस पर सरकार के दावे की पोल खोल दी वरिष्ठ समाजवादी नेता बीनू यादव ने, कहा...सिस्टम की संवेदनहीनता से मरीजों की स्थिति और रही गंभीर

PATNA : एक तरफ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय यह दावा करते हैं कि ब्लैक फंगस के मरीजों को लेकर सरकार की तरफ से पूरी सहायता की जा रही है। उनके लिए सरकार की तरफ मुफ्त लाखों रुपए की दवा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र पारस हॉस्पीटल में ब्लैक फंगस के मरीज को दवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। मरीज के भाई के कहना है कि सरकार और प्राइवेट अस्पतालों के बीच सामंजस्य नहीं है, जिसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है।

मामला वरिष्ठ समाजवादी नेता बीनू यादव से जुड़ा है, जिनके भाई कोरोना से ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस से ग्रसित हो गए। उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना के पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां चेकअप के बाद संबंधित डॉक्टर ने इंफोलिव नाम की दवा लाने की बात कही। बीनू यादव ने बताया कि हर दिन इस दवा की 12 डोज की जरुरत बताई गई। एक डोज में 50 एमएल दवा होती है। बताया गया अस्पताल की तरफ से जिले के सिविल सर्जन को दवा उपलब्ध कराने की सूचना दी गई. शुरुआत में एक दो दिन दवा उपलब्ध कराई गई। लेकिन कल यह दवा नहीं दी गई। जिसके कारण मेरे भाई की हालत गंभीर हो गई है। बीनू यादव का कहना है कि सरकार को बातों की जगह काम करने की जरुरत है।

दवा उपलब्ध तो क्यों नहीं दी रही 

बीनू यादव ने बताया कि सरकार कहती है कि उनके पास ब्लैक फंगस की पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, जबकि पारस अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सरकार उन्हें दवा नहीं दे रही है। ऐसे में कहीं न कहीं सरकार और प्राइवेट अस्पताल  के बीच सामंजस्य नहीं है। जिसका खामियाजा अस्पतालवाले भुगत रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार को चाहिए कि ऐसे सभी केंद्रों पर एक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया जाए, ताकि मरीजों को होनेवाल परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार को अपना झूठा खेल बंद करनी चाहिए, वहीं अस्पताल प्रशासन अपने मरीजों के साथ इस तरह का रवैया न अपनाए

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