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बिहार में सड़कों पर आप कितने हैं सुरक्षित? वैशाली हादसा न पहला न आखिरी, हर दिन 20 से ज्यादा लोगों की हो जाती है अकाल मौत

बिहार में सड़कों पर आप कितने हैं सुरक्षित? वैशाली हादसा न पहला न आखिरी, हर दिन 20 से ज्यादा लोगों की हो जाती है अकाल मौत

पटना. बिहार के वैशाली में हुए सड़क हादसे न सिर्फ बिहार के शराबबंदी कानून की पोल खोल रहा है, बल्कि सड़क पर लोग कितने सुरक्षित है, इस पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। अबतक कि जानकारी के अनुसार इस हादसे का मूल कारण ड्राइवर के शराब पीने और ओवरस्पीडिंग को बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल खड़ा हो चला है कि इसके प्रति सरकार कितने गंभीर है। बिहार में पिछले छह सालों से पूर्णरूप से शराब बंद है, लेकिन इस पर लगाम नहीं लग रही है। इसके कारण आए दिन घटनाएं हो ही रही है। वहीं बिहार में हर साल हजारों लोग काल के गाल में समा रहे हैं।

12 लोगों की मौत

वैशाली में हुए हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत हो गयी है, जबकि कई गंभीर घायल है। मिली जानकारी के अनुसार वैशाली के देशरी थाना क्षेत्र के नयागंज 28 टोला स्थित ब्रह्मस्थान के पास लोग भुइयां बाबा की पूजा कर रहे थे। इस दौरान एक अनियंत्रित ट्रक ने 30 लोगों को रौंद दिया, जिसमें अभी तक 12 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में छह बच्चे भी शामिल है। वहीं हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल है। बताया जा रहा है कि ट्रक चालक नशे में था। 

बिहार में हर दिन 20 से ज्यादा लोगों की मौत

एनसीआरबी- 2021 की रिपोर्ट अनुसार पिछले वर्ष बिहार में सड़क हादसों के कुल 9553 मामले सामने आये। इनमें 7946 लोग घायल हुए, जबकि 7660 की मौत हुई। इसके मुताबिक बिहार में हर दिन 20 से ज्यादा लोगों की मौत सड़क हादसे में हुई है। दो पहिया वाहनों से हुई दुर्घटनाओं में 2749 लोग घायल हुए और 2657 की मौतें हुईं। वहीं ट्रक की टक्कर से 126 लोग मारे गए तो बस से हुई दुर्घटना 71 की मौत हुई। एयूवी, कार और जीप से हुई दुर्घटनाओं में 504 लोगों की मौतें हुईं।

बिहार में सबसे ज्यादा पैदल यात्री शिकार

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार देश में सबसे अधिक पैदल चलने वाले लोग बिहार में सड़क दुर्घटना के शिकार होते हैं। यानी पैदल यात्रियों की सबसे अधिक जान बिहार की सड़कों पर जा रही है। एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2021 के दौरान हुए सड़क हादसों में कुल 18,936 पैदल यात्रियों की मौत हुई, जिनमें से सबसे अधिक 2,796 लोगों की मौत अकेले बिहार में हुई, जो कुल मौतों का 14.8 प्रतिशत है।


बिहार में ओवरस्पीडिंग से सबसे ज्यादा हदसा

आंकड़े के अनुसार बिहार में सबसे ज्यादा हादसा ओवरस्पीडिंग के कारण होते हैं। एनसीआरबी की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार एक वर्ष में बिहार में ओवरस्पीड की वजह से 2886 हादसे हुए, जिसमें 2284 लोगों की मौत हो गयी। वहीं की वजह से शराब 51 हादसे हुए, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गयी। रांग साइड के 1134 मामले में 903, मोबाइल फोन की वजह से 113 हादसे में 92 और अन्य कारणों से 5369 हादसे में 4369 लोगों की मौत हो गयी।

पांच एनएच पर 50 प्रतिश हादसा

वहीं बिहार से गुजरने वाले पांच राष्ट्रीय राजमार्ग पर 50 प्रतिशत से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। इनमें एनएच-2 का वाराणसी-औरंगाबाद, एनएच-28 का छपरा-बेतिया-लौरिया-बगहा, एनएच-30 का पटना-बख्तियारपुर, एनएच-31 का बरौनी-मुजफ्फरपुर-पिपराकोठी और एनएच-57 का मुजफ्फरपुर-दरभंगा-पूर्णिया खंड शामिल है। यह जानकारी सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सामने आयी है। इन पांच हाइवे पर सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए आधुनिक उपकरणों की खरीद करने का निर्देश दिया गया है। 

50 बड़े शहरों में मौत के मामले में पटना 43 वें स्थान पर

10 लाख से अधिक की आबादी वाले 50 शहरों में बिहार से सिर्फ पटना शामिल है, जहां सर्वाधिक एक्सीडेंट और उसमें मौतें होती हैं। इन 50 शहरों में पटना का स्थान 43 वां है, जबकि टॉप पर चेन्नई है। 2019 में पटना में 524 हादसे हुए, जिसमें मौत की संख्या 192 रही। 2020 में लॉकडाउन के बाद भी पटना 373 हादसे हुए, जिसमें 181 की मौत हुई।

बिहार सरकार द्वारा व्यवस्था

बिहार में सड़क हादसे में मौत और घायल पर बिहार सरकार ने तत्काल आर्थिक राहत की व्यवस्था की है। हादसे में मौत पर तत्काल मृतक के परिजनों को आपदा राहत कोष से पांच लाख रुपये और घायलों के 50 हजार रुपये देने का प्रवधान है। 

हादसे में 2021 में 1.55 लाख लोगों की गयी जान

भारत में 2021 में हुए सड़क हादसों के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि देश में वर्ष 2021 में सड़क दुर्घटनाओं में 1.55 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई है। यह आंकड़ा औसतन 426 लोग प्रतिदिन या हर घंटे 18 लोगों का है। एनसीआरबी की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में देश में कुल 4,03,116 सड़क हादसे हुए, जो 2020 में हुए 3,54,796 सड़क हादसों से 48,320 अधिक हैं। इस दौरान कुल 1,55,622 लोग काल के गाल में समा गये, जो 2020 की तुलना में 16.8 प्रतिशत है।