हिंदुओं ने अगर मान ली विश्व हिंदू परिषद की अपील तो जनसंख्या नियंत्रण कानून के मोदी सरकार के मंसूबों पर फिर जाएगा पानी

हिंदुओं ने अगर मान ली विश्व हिंदू परिषद की अपील तो जनसंख्या नियंत्रण कानून के मोदी सरकार के मंसूबों पर फिर जाएगा पानी

दिल्ली. केंद्र की मोदी सरकार जिन कुछ कानूनों को लागू कराने के वादे के साथ सत्तासीन हुई है उसमें जनसंख्या नियंत्रण कानून भी शामिल है. हालाँकि पीएम मोदी ने कभी भी इस कानून को लागू करने की खुली वकालत नहीं की है लेकिन उनके दल और सरकार में शामिल कई नेता-मंत्री इस कानून के हिमायती रहे हैं. केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह कई बार जनसंख्या नियन्त्रण कानून के पक्ष में बयानबाजी कर चुके हैं. 

लेकिन भाजपा की हितैषी माने जाने वाली विश्व हिंदू परिषद अब मोदी सरकार के मंसूबों पर पानी फेरते नजर आ रही है. विहिप ने हिंदुओं को एकजुट करने के लिए 10 दिवसीय अभियान की शुरुआत की है. 23 जनवरी तक चलने वाले इस अभियान का मुख्य मकसद हिंदुओं के बीच जाति भेद मिटाना है. इसे विहिप ने समरसता अभियान नाम दिया गया है. समरसता अभियान के दौरान सह भोज समेत अलग-अलग प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा. सह भोज में अगड़ी और पिछड़ी जातियों के लोग एक साथ भोजन करेंगे. इस दौरान लोगों को सभी हिंदू एक हैं…का संदेश दिया जायेगा.


हालाँकि इसी बीच विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री मिलिंद परांडे का एक बयान अब विवादों में घिर गया है. उन्होंने कहा है कि हिंदुओं की कम होती आबादी चिंता का विषय है. भारत पर सदियों से आक्रमण होता रहा लेकिन आज भी इस देश में हिंदू सबसे ज्यादा हैं. यह हमारी सहनशीलता और आध्यात्मिक शक्ति की वजह से ही संभव हुआ है. हालाँकि जिस तेजी से हिंदुओं की आबादी कम हो रही है उस स्थिति में हर हिंदू परिवार में 2 से 3 बच्चे होने चाहिए. अगर हमारी आबादी कम होगी तो भविष्य में हमारे अस्तित्व का संकट खड़ा हो जायेगा.  

परांडे के इस बयान पर कई लोगों ने आपत्ति जताई है. इसे भारत में जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में गलत संदेश देना कहा है. दरअसल भाजपा के कई नेता जनसंख्या नियंत्रण कानून के पक्ष में बयान भी दे चुके हैं.लेकिन ऐसे में विहिप नेता का बयान देश में आबादी बढ़ाने के लिए लोगों को प्रेरित करता दिख रहा है. 


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