अपने ही गढ़ में बेटे को मुखिया का चुनाव भी नहीं जीता सका जदयू का यह दिग्गज सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री को दी थी शिकस्त

अपने ही गढ़ में बेटे को मुखिया का चुनाव भी नहीं जीता सका जदयू का यह दिग्गज सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री को दी थी शिकस्त

DEHRI : बिहार के पंचायत चुनाव में कई दिग्गज नेता अपने रिश्तेदारों को जीत दिलाने में नाकामयाब रहे हैं। अब फेहरिस्त में एक और नाम शामिल हो गया है। जदयू से दूसरी बार सांसद बने महाबली सिंह का, जिनका बेटा मुखिया का चुनाव हार गया है। 

महाबली सिंह फिलहाल काराकट लोकसभा सीट से सांसद हैं  और उन्होंने अपने बेटे धर्मेंद्र कुमार सिंह को भगवानपुर पंचायत से मुखिया चुनाव में उतारा था। उम्मीद कि सांसद होने का फायदा बेटे को मिलेगा, लेकिन ग्रामीणों ने उसे सिरे से खारिज कर दिया। बेटे धर्मेंद्र सिंह को उपेंद्र पांडेय ने 471 मतों से हराया है। उपेंद्र को 1406 और धर्मेंद्र को 935 वोट मिले। 

विधानसभा चुनाव में भी मिली थी हार

धर्मेंद्र इससे पहले विधानसभा के चुनाव में भी हार का मुंह देख चुके हैं।  2010 में राजद के टिकट पर चैनपुर विधानसभा क्षेत्र से धर्मेंंद्र ने चुनाव लड़ा था। उन्हें करीब 20 हजार मत मिले थे। भाजपा प्रत्याशी बृजकिशोर बिंद ने धर्मेंद्र को हराया था। बृजकिशोर बिंद मंत्री भी बने थे।

महाबली सिंह का क्षेत्र रहा है चैनपुर

चैनपुर विधानसभा क्षेत्र में ही भगवानपुर प्रखंड पड़ता है। चैनपुर विस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व महाबली सिंह कुशवाहा को कई बार करने का मौका मिला। वह राजद की सरकार में विभिन्न विभागों के मंत्री भी रहे थे। बसपा के टिकट पर पहली बार जीत हासिल की थी। राजद से होते हुए वह जदयू में शामिल हुए। रोहतास व कैमूर जिले को मिलाकर बना काराकाट संसदीय क्षेत्र का वह प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 

उपेंद्र कुशवाहा को दी थी मात

पिछले चुनाव में काराकाट लोकसभा क्षेत्र से एनडीए की तरफ से जदयू ने महाबली सिंह को उतारा था। उन्होंने तत्कालीन रालोसपा प्रत्याशी और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को 84542 वोटों से पराजित किया था। महाबली सिंह को 398408 और उपेंद्र कुशवाहा को 313866 वोट मिले थे।


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