सेनारी नरसंहार केस में देश के दो बड़े वकील सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार का रखेंगे पक्ष, सरकार इन दो नामी वकीलों की लेगी सेवा

सेनारी नरसंहार केस में देश के दो बड़े वकील सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार का रखेंगे पक्ष, सरकार इन दो नामी वकीलों की लेगी सेवा

PATNA: बिहार के चर्चित सेनारी नरसंहार कांड में पटना हाईकोर्ट ने 22 मई  को निचली अदालत से दोषी ठहराए गए 15 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। साथ ही सभी को तुरंत जेल से रिहा करने का आदेश दिया था। 18 मार्च 1999 को वर्तमान अरवल जिले (तत्कालीन जहानाबाद) के करपी थाना के सेनारी गांव में 34 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। आरोप प्रतिबंधित एमसीसी उग्रवादियों पर लगा था। इसी मामले में पटना हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ के न्यायामूर्ति अश्वनी कुमार सिंह और न्यायमूर्ति अरविंद श्रीवास्ताव ने सेनारी नरसंहार कांड की सुनवाई के बाद फैसला दिया था। पटना हाईकोर्ट से सेनारी नरसंहार के 15 आरोपियों को बरी किये जाने के बाद बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट गई है। महाधिवक्ता ललित किशोर ने24 मई को ही पटना हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में जाने की सिफारिश की थी। बिहार सरकार इस केस में दो वरिष्ठत्तम वकीलों की सेवा लेने जा रही है।  

विधि विभाग ने गृह विभाग को भेजा पत्र

विधि विभाग के सचिव पीसी चौधरी ने इस संबंध में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि सेनारी हत्याकांड से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय में दायर एस एल पी मामले में दो वरीय अधिवक्ता की सेवा ली जानी है। विद्वान महाधिवक्ता के पत्रांक- 4, 24 मई 2021 से प्राप्त परामर्श के आलोक में इस मामले में राज्य सरकार वरीय अधिवक्ता के रूप में वेणुगोपाल अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया और तुषार मेहता सॉलीसीटर जनरल ऑफ इंडिया की सेवा लेगी। सरकार इस शर्त के साथ सेवा लेने की सहमति प्रदान की है कि उक्त वरीय अधिवक्ताओं के शुल्क का भुगतान गृह और वित्त विभाग की सहमति से अपने स्तर यानी विधि विभाग करेगा

निचली अदलात ने 11 आरोपियों को सुनाई थी फांसी की सजा

 निचली अदालत द्वारा 15 नवंबर 2016 को नरसंहार कांड के 11 आरोपियों को फांसी की सजा और अन्य को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। सजा पाए आरोपियों ने निचली अदालत के फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए अपील दायर की थी।पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी पक्ष यानी अभियोजन पक्ष इस कांड के आरोपियों पर लगे आरोप को साबित करने में असफल है। नरसंहार कांड के इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता और ठोस साक्ष्य पेश करने में |





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