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किसमें भरोसा करें, विज्ञान या भगवान? चर्च के खिलाफ जाकर इन वैज्ञानिकों ने रखी आधुनिक विज्ञान की नींव, पृथ्वी गोल हैं बताने पर सहनी पड़ी थी यातना,देनी पड़ी थी जान

किसमें भरोसा करें, विज्ञान या भगवान? चर्च के खिलाफ जाकर इन वैज्ञानिकों ने रखी आधुनिक विज्ञान की नींव, पृथ्वी गोल हैं बताने पर सहनी पड़ी थी यातना,देनी पड़ी थी जान

चंद्रयान-3 ने चांद की अपनी यात्रा शुरू कर दी है. वहीं बहुत से वैज्ञानिक भी ये मानते हैं कि इस दौर का इंसान अक़्लमंदी के शिखर पर है. इसे बुद्धिमत्ता का स्वर्ण युग कहा जा रहा है. पुरातन समय से लेकर आधुनिक समय तक हमने विज्ञान क्षेत्र में लंबी यात्रा तय की है. पुराने समय में ये यात्रा कभी भी सुगम नहीं रही, सत्ता और ज्ञान  का संघर्ष लगातार चला. ज्ञानियों ने सत्ता के अंधविश्वास को लगातार चुनौती दी,चर्च के हाथ खून से रंगे होने के कई प्रमाण इतिहास में दर्ज है.



ये साल 1634 की बात है. और जिस शख़्स की ज़बान से ये शब्द निकले थे, उनका नाम था गैलीलियो गैलिली. वो शख़्स जिसने ये बोलकर कि सूरज धरती के चारों तरफ़ नहीं घूमता बल्कि धरती सूरज के चारों तरफ़ घूमती है, धर्म की सत्ता को चुनौती दे डाली थी. और जिसकी उसे बड़ी भारी सजा भुगतनी पड़ी थी. लेकिन क्या गैलीलियो का कसूर सिर्फ़ इतना ही था? रोमन कैथोलिक चर्च ने गैलीलियो को सन 1633 में सजा सुनाई. जबकि इससे एक सदी पहले ही निकोलस कॉपरनिकस ने धरती के सूरज के इर्द गिर्द घूमने वाली थियोरी दे दी थी. कई साल तक आम लोगों के बीच भी ये बात प्रचलित रही थी. उनके मरने के बाद उनके शरीर से तीन उंगलियां काट ली गई.गैलीलियो का यह सिद्धान्त धार्मिक मान्यताओं के विरूद्ध था इसलिये गैलीलियो का विरोध हुआ. चर्च ने गैलिली को आदेश दिया कि वह इसे अपनी सबसे बड़ी भुल बताए और माफी मांगे.उन्हें जेल में डाल दिया गया.जीवन के आखिरी वर्षो में गैलीलियो की आंखों की रोशनी चली गयी थी. 8 जनवरी 1642 को गैलेलियो की जेल में रहते हुए ही मृत्यु हो गयी. गैलीलियो तो इस दुनिया को अलविदा कह गए लेकिन उनकी खोज और आविष्कार आज भी खगोल विज्ञान में मील का पत्थर है.



जियोर्दानो ब्रूनो इटली का दार्शनिक, गणितज्ञ एवं खगोलवेत्ता था जिसे कैथोलिक चर्च ने अफवाह फैलाने का आरोप लगाकर जिन्दा जला दिया था. अपनी मृत्यु के बाद वह बहुत प्रसिद्ध हुआ. उन्नीसवीं-बीसवीं शताब्दी के समीक्षकों ने उसे 'स्वतंत्र चिन्तक शहीद' और आधुनिक वैज्ञानिक विचारों का उद्घोषक माना है.जियोर्दानो ब्रूनो ने खगोल वैज्ञानिक निकोलस कोपरनिकस के विचारों का समर्थन किया था. वह भी उस समय, जब यूरोप में लोग धर्म के प्रति अंधे थे. धर्म के प्रति ब्रूनो का विचार था कि - 'धर्म वह है, जिसमें सभी धर्मों के अनुयायी आपस में एक-दूसरे के धर्म के बारे में खुलकर चर्चा कर सकें.'ब्रूनो का विचार था कि - हर तारे का वैसा ही अपना परिवार होता है जैसा कि हमारा सौर परिवार है. सूर्य की तरह ही हर तारा अपने परिवार का केंद्र होता है.महान खगोलशास्त्री जियोर्दानो ब्रूनो की धारणा थी कि - 'इस ब्रह्मांड में अनगिनत ब्रह्मांड हैं. ब्रह्मांड अनंत और अथाह है.उनका कहना था कि धरती ही नहीं, सूर्य भी अपने अक्ष पर घूमता है.जियोर्दानो ब्रूनो को चर्च के पादरियों का विरोध भी डरा ना सका. ब्रूनो जीवन भर चर्च की कठोर यातनाएँ सहते रहे. 17 फरवरी, सन 1600 ई. को  तत्कालीन पोप और चर्च के पादरियों  ने खुलेआम रोम में भरे चौराहे पर ब्रूनो को खंभे से बांध कर मिट्टी का तेल उन पर छिड़क कर जला डाला.



ब्रूनो के जीवनकाल में ये तथ्य लोगों को समझ में नहीं आया और उनको पुरजोर विरोध हुआ. लेकिन उनकी निर्मम हत्या के बाद यह साबित हो गया कि सूर्य भी अपने अक्ष पर घूमता ह.। ब्रूनो की मृत्यु के लगभग 200 वर्षों बाद हमारे सौरमंडल के 7वें ग्रह 'यूरेनस' की खोज हुई.



हाईपेशिया को अक्सर अलेक्जेंड्रिया का 'हाइपैसिया' 'कहा जाता है, जो तब पूर्वी रोमन साम्राज्य का एक भाग था में एक ग्रीक गणितज्ञ, खगोलविद, और दार्शनिक थी. वह नीओप्लेटोनिक स्कूल अलेक्जेंड्रिया की प्रमुख थी, जहां वह दर्शन और खगोल विज्ञान पढ़ाती थी. वह दुनिया की सबसे पहली गणित पढ़ाने वाली महिला भी थी. ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार  क्रिश्चियन या ईसाई उग्रवादियों द्वारा हाइपातिया की हत्या कर दी गई थी. उस पर अलेक्जेंड्रिया में दो प्रमुख आदमियों, गवर्नर, ओरेस्टेस और बिशप सिरिल ऑफ अलेक्जेंड्रिया के बीच एक संघर्ष को उकसाने का आरोप लगाया गया था.  गणितज्ञ और दार्शनिक अलेक्जेंड्रिया की हाइपियासिया गणितज्ञ थियोन ऑफ अलेक्जेंड्रिया की एकमात्र बेटी थी. उसकी संवृद्ध लाइब्रेरी जला दी गई, हाइपेशिया मार डाली गई,विरासत नष्‍ट कर दी गई,लेकिन ज्ञान कभी मरता नहीं है,अलेक्जेंड्रिया का 'हाइपैसिया आज भी अमर हैं.



  

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