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भ्रष्टाचार के कुएं में गोते लगाता भारत..बिना चढ़ावा सरकारी काम नहीं होता! रिपोर्ट आंखे खोलने वाली,पढ़िए कर्मचारी कमीशन और रिश्वत के खेल पर इनसाइड स्टोरी....

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दिल्ली- सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार का शिकंजा कितनी गहरी पैठ बना चुका है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिसे इसको रोकने की जिम्मेवारी मिली है वहीं इससे संबंधित शिकायतों का अंबार लगा है.केंद्र सरकार के दावों के बावजूद उसके विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार दूर करने में सफलता नहीं मिल सकी है. इन विभागों में छोटे-बड़े कामों के लिये चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है. हर चुनाव में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा होता है. कई सरकारों की तो  भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विदाई भी हो चुकी है लेकिन भ्रष्टाचार उन्मूलन के नाम पर सत्ता में आई सरकारों में भी यह स्थिति बदली नहीं है. विश्व के सर्वे में हर बार भारत भ्रष्टाचार के पायदान में चढ़ता या उसके आसपास ही दिखता है. एनडीए सरकार ने भ्रष्टाचार के खात्मे को अपनी प्राथमिकता बनाया है लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात रहे.

 केंद्रीय सतर्कता आयोग यानी सीवीसी की भ्रष्टाचार पर आई रिपोर्ट कमोबेश यही स्थिति दर्शाती है. सीवीसी की रिपोर्ट में रेलवे, गृह मंत्रालय और बैंकों में अनियमितताओं की सबसे अधिक शिकायतें पायी गई हैं. केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के खिलाफ एक लाख पंद्रह हजार अनियमितताओं की शिकायतें दर्ज की गई हैं.

जनहित के लिये जवाबदेह गृहमंत्रालय के अधिकारियों के खिलाफ हीं सबसे ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं हैं. इन शिकायतों में से आधी शिकायतों का निस्तारण हो पाया है, नियम से सीवीसी को ऐसी शिकायतों का निदान तीन माह के भीतर करना होता है, लेकिन बड़ी संख्या में शिकायतें तीन माह से अधिक समय से लंबित हैं. यह स्थिति तब है जबकि एनडीए सरकार का दावा रहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति का पालन किया जायेगा. त्रासदी देखिए कि  जिस विभाग के पास कानून-व्यवस्था को बनाये रखने का दायित्व है, उसी में अनियमितताओं के ज्यादा मामले सामने आए हैं. 

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जब केंद्रीय सरकार के विभिन्न विभागों में बीते एक साल में भ्रष्टाचार के एक लाख पंद्रह हजार मामले दर्ज हुए हैं, तो राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों की क्या स्थिति होगी.चिंताजनक बात यह है कि केंद्र की सख्ती के बावजूद उसके विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार पर अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है. भ्रष्ट अधिकारी अपने बचाव के लिये तमाम तरह से कई कानूनों को अपनी ढाल बनाने से भी नहीं चूकते हैं.

 डिजिटल प्रणाली के जरिये कार्यों के निष्पादन से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है. भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी कमीशन और रिश्वत लेने के तमाम चोर रास्ते खोज ही लेते हैं. आम धारणा बनती गई है कि कोई भी सरकारी काम बिना चढ़वा के नहीं हो सकता.