'नीतीश' की समाधान यात्रा है या फोटो खिंचाई यात्रा ? झंझारपुर गए पर विस्थापित परिवारों से मिलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए, CM ने खुद दिया था पर्चा पर आज तक नहीं मिली जमीन

'नीतीश' की समाधान यात्रा है या फोटो खिंचाई यात्रा ? झंझारपुर गए पर विस्थापित परिवारों से मिलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए, CM ने खुद दिया था पर्चा पर आज तक नहीं मिली जमीन

PATNA: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समाधान यात्रा आज मधुबनी के झंझारपुर में है। प्रशासन द्वारा पहले से तैयार किये गए जगह पर मुख्यमंत्री अपने अमला-जमला के साथ गए और अपनी पीठ खुद थपथपाई। वैसे मुख्यमंत्री जा भी कहां सकते थे, तय स्थान से इतर जाते तो 17 सालों के सुशासन राज की पोल जो खुल जाती. मुख्यमंत्री जी...यह कैसी समाधान यात्रा? समाधान तो हुआ नहीं सिर्फ फोटों खिंचा कर दिखावा किया जा रहा।

झंझारपुर का 60 परिवार 2019 से ही समाधान की आस में

झंझारपुर के अति पिछड़ा समाज के 60 परिवार 2019 से अब तक सीएम नीतीश से समाधान की आस लगाये बैठा है. मुख्यमंत्री ने ही इन परिवारों के साथ छल किया था. छल इसलिए क्यों कि इन विस्थापित परिवारों को खुद सीएम ने जमीन का पर्चा दिया था. तीन साल से अधिक का समय बीत गया, आज भी 60 परिवार बेबस बना है. झंझारपुर आईबी परिसर में ही छतरी तान कर जीवन जीने को विवश है. सिर्फ पर्चा मिला, जमीन आज तक नहीं मिली। पर्चा वाली जमीन को लेकर विस्थापित परिवारों ने नीतीश कुमार के जनता दरबार में भी गुहार लगाई. विस में भी मामला उठा, मगर कुछ नहीं हुआ। मुख्यमंत्री झंझारपुर गए लेकिन बेबस परिवारों की सुध नहीं ली. अगर इन विस्थापित परिवारों की समस्या का समाधान हो जाता तो माना जाता कि वाकई में नीतीश कुमार समाधान यात्रा पर हैं. पर यहां तो सिर्फ दिखावा किया जा रहा और फोटो खिंचाकर मीडिया में वाहवाही लूटी जा रही। दरअसल, नीतीश सरकार बिहार की मेन स्ट्रीम मीडिया पर जमकर कृपा बरसा रही है. लिहाजा सिर्फ गुणगान किया जा रहा। इन समस्या को लेकर कोई आवाज नहीं उठाई जा रही।

झंझारपुर से विस्थापित परिवारों का दर्द  

झंझारपुर से 60 विस्थापित परिवारों की बेबसी को देखिए। इन परिवारों के दुःख-दर्द को सुनकर हृदय द्रवित हो उठेगा,पर सरकार का कलेजा तो पत्थऱ का है। आज यह सवाल एक बार फिर से उठा है. सवाल इसलिए क्यों कि खुद सीएम नीतीश कुमार झंझारपुर के दौरे पर हैं. नीतीश कुमार झंझारपुर गये, लेकिन पुरानी बातों को भूल गए. 2019 में झंझारपुर अंचल के पंचायत नरूआर उसराहा मंडल टोला में आई भीषण बाढ से गांव के लोगों का सबकुछ बह गया था. 60  परिवारों के करीब 300 लोग विस्थापित होकर बांध के किनारे चार साल से पन्नी टांग कर जीव-बसर कर रहे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी हाथों से इन विस्थापित परिवारों को पुर्नवास के लिए जमीन का पर्चा दिया था। तब कहा था कि जल्द ही आप सबलोगों का पुर्नवास कर दिया जायेगा। लेकिन 2019 से 2023 आ गया, न जमीन मिली न मकान बना। सिर्फ क्षतिपूर्ति के नाम पर 95100 रुपये देकर प्रशासन ने अपना पल्ला झाड़ लिया. विस्थापित परिवार विस्थापित ही रह गया. नीतीश कुमार का जमीन के लिए दिया पर्चा आज भी उस ठगी का प्रमाण है। विस्थापित परिवार के लोगों का कहना है कि स्थानीय विधायक नीतीश मिश्रा ने इस मामले को विधानसभा में उठाया । इसके बाद भी सरकार ने कोई सुध नहीं ली। स्थानीय लोगों का कहना है कि हमलोग अपनी मांग को लेकर नीतीश कुमार के जनता दरबार में गए. मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें याद दिलाया कि आपने हमलोगों को जमीन का पर्चा दिया था, पर आज तक हमलोगों को जमीन नहीं मिली। इसके बाद मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया और अधिकारियों को आदेश दिया. फिर भी जमीन नहीं दिया गया. आज भी हम सभी विस्थापित परिवार पन्नी तान कर जीवन-बसर कर रहे हैं। ऐसे में नीतीश कुमार किस समाधान यात्रा पर निकले हैं. समाधान यात्रा तो तब कहते जब हमलोगों की समस्या का समाधान हो जाता। 

स्थानीय MLA बोले- यह कैसी समाधान यात्रा जहां समस्या का समाधान ही नहीं हुआ ?

इस संबंध में जब झंझारपुर के स्थानीय विधायक नीतीश मिश्रा से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि विस्थापित 60 परिवार आज भी अपनी समस्या के समाधान के इंंतजार में है.मुख्यमंत्री के हाथों इनलोगों को जमीन का पर्चा दिया गया था. आज तक जमीन नहीं दी गई। हमने विधानसभा में मामला उठाया, इसके बाद भी समाधान नहीं हुआ। ऐसे में मुख्यमंत्री समाधान यात्रा के क्रम में झंझारपुर तो आये, इसके बाद भी इन परिवारों का समाधान नहीं हुआ. कहा जा सकता है कि अगर विस्थापित अति पिछड़ा समाज के 60 परिवारों की समस्या का समाधान हो जाता तब यात्रा को सफल कहा जाता, वरना......।

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