जामताड़ा के साइबर क्रिमिनल्स की अब खैर नहीं, झारखंड में 26000 युवाओं की फौज तैयार

जामताड़ा के साइबर क्रिमिनल्स की अब खैर नहीं, झारखंड में 26000 युवाओं की फौज तैयार

Desk: जामताड़ा के साइबर क्रिमिनल्स के खात्मे और उनकी दुकान बंद करने के लिए झारखंड में कम से कम 26,000 साइबर एक्सपर्ट की फौज तैयार हो चुकी है. ऐसे युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. साइबर क्राइम के खिलाफ तैयार हो रही इस फौज में कोई भी छात्र या युवा शामिल हो सकता है.

केंद्र सरकार की पहल पर झारखंड समेत पूरे देश में प्रज्ञा केंद्रों के जरिये यह ट्रेनिंग दी जा रही है. सिर्फ झारखंड में 26,000 से ज्यादा छात्र और युवाओं ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन करवाया. इन्हें साइबर क्राइम का शिकार होने से बचने के तरीके बताये गये. ट्रेनिंग लेने वालों में शिक्षक और टीचर दोनों शामिल हैं. झारखंड के सीएससी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ने बताया कि इस ट्रेनिंग के बाद जामताड़ा या देश-दुनिया का कोई भी ठग उन्हें आसानी से अपना शिकार नहीं बना पायेगा. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद लोगों में इतनी समझ तैयार हो जाती है कि साइबर क्रिमिनल किस तरह से लोगों को फंसाते हैं.

उन्होंने बताया कि इसके लिए हर जिला में कम से कम एक एकेडमिक सेंटर बनाया गया है. यही सेंटर प्रोग्राम को संचालित करता है. इस ट्रेनिंग में आइटी एक्सपर्ट बताते हैं कि अपने डाटा को कैसे सुरक्षित रखें. हैकिंग से कैसे बचें और साइबर फिशिंग करने वालों के झांसे में आने से कैसे बचें. ऑनलाइन ठगी करने वाले साइबर क्रिमिनल्स को ठिकाने लगाने के लिए भारत सरकार के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस अभियान की शुरुआत की. इसके तहत युवाओं को प्रज्ञा केंद्रों के जरिये साइबर सिक्यूरिटी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. बच्चों को इस ट्रेनिंग प्रोग्राम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि वे साइबर क्रिमिनल्स का शिकार होने से खुद भी बचें और लोगों को भी बचा सकें.

आपको बता दें कि 12 जुलाई से 12 अगस्त, 2020 तक चलाये गये जागरूकता अभियान के दौरान रजिस्ट्रेशन कराने वालों को मुफ्त में ट्रेनिंग दी गयी. अब इसके लिए लोगों को 1,180 रुपये का भुगतान करना होता है. ऑनलाइन ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इसकी परीक्षा होगी. परीक्षा पास करने वालों को सीएससी एकेडमी की ओर से बाकायदा प्रमाण पत्र भी दिया जाता है.

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