जेडीयू MLC की उल्टी गिनती ! नेताओं ने ही रामेश्वर महतो की खोली पोल,कहा- 'टैक्स' वाले नेताजी को सेट कर बने थे माननीय, अब व्याकुल नेता के अघोषित प्रवक्ता बने

जेडीयू MLC की उल्टी गिनती !  नेताओं ने ही रामेश्वर महतो की खोली पोल,कहा- 'टैक्स' वाले नेताजी को सेट कर बने थे माननीय, अब व्याकुल नेता के अघोषित प्रवक्ता बने

PATNA: सत्ताधारी दल जेडीयू के भीतर उपेन्द्र कुशवाहा के साथ-साथ एमएलसी रामेश्वर महतो भी पूरी तरह से घिर गए हैं. मंत्री अशोक चौधरी पर गंभीर टिप्पणी करने के बाद रामेश्वर महतो ने नेतृत्व से सीधा पंगा ले लिया है। इनकी स्थिति यह हो गई है कि दल के अंदर के नेता ही अब विधान पार्षद का मजाक उड़ा रहे हैं. पार्टी के प्रदेश सचिव ने रामेश्वर महतो को व्याकुल नेता का वैसा अघोषित प्रवक्ता करार दिया है जिनकी सदस्यता खत्म होने वाली है. नेताओं ने रामेश्वर चौरसिया की बेचैनी का खुलासा करते हुए कहा कि इनकी अगले साल विप की सदस्यता खत्म होने वाली है, इसीलिए डॉ. अशोक चौधरी के बारे में अनाप-शनाप लिख रहे.

जेडीयू के प्रदेश सचिव रंजीत झा ने पार्टी के विधान पार्षद रामेश्वर महतो पर बड़ा हमला बोला है. रामेश्वर महतो द्वारा अशोक चौधरी के बारे में फेसबुक पर की गई टिप्पणी का जवाब देते हुए सोशळ मीडिया पर लिखा कि आने वाले समय में आपकी विधान परिषद की सदस्यता खत्म होने वाली है, जिसके कारण आप काफी बेचैन हैं. इसीलिए लगातार डॉ अशोक चौधरी जी के बारे में अनाप-शनाप फेसबुक पोस्ट किए जा रहे हैं। आप अपने राजनीतिक जीवन में कभी राजनीतिक कार्यकर्ता तो रहे नहीं. सेटिंग करके टैक्स वाले नेताजी के जरिए पार्टी के दूसरे कार्यकर्ता का हक मार कर विधान परिषद में पहुंच गये. इसलिए आपको डॉ अशोक चौधरी के राजनीतिक कार्यशैली के बारे में जानकारी नहीं है। अपने राजनीतिक कार्यकुशलता की बदौलत डॉ अशोक चौधरी जी ने चार विधायक वाली कांग्रेस पार्टी को 27 विधायक तक पहुंचाया और कई सामान्य राजनीतिक कार्यकर्ता को सदन तक पहुंचाया .

प्रदेश सचिव रंजीत झा ने विधान पार्षद रामेश्वर महतो पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि आपने डॉ दिलीप चौधरी के बारे में चर्चा किया. आप अपनी जानकारी को दुरुस्त कर लें कि जदयू में आने के बाद अशोक चौधरी ने उनको विधान परिषद चुनाव में पार्टी का प्रत्याशी बनवाया, लेकिन दुर्भाग्यवश भाजपा के आंतरिक विरोध करने के कारण वह चुनाव नहीं जीत पाए। स्व. तनवीर अख्तर के बारे में आपने जिक्र किया तो अगर कभी मौका मिले तो जाकर उनके परिजनों से बात करिएगा ,आपको पता चलेगा की उनके निधन के बाद से उनकी पत्नी को विधान परिषद में जाने से लेकर आज तक किस तरह से डॉ अशोक चौधरी उनके साथ खड़े हैं। 

रामचंद्र भारती के बारे में आपको पता नहीं है कि वह मुख्यमंत्री के क्षेत्र के हैं, उनके पुराने शुभचिंतकों में रहे हैं. मुख्यमंत्री ने ही उन्हें विधान परिषद में भेजा था और आज भी मुख्यमंत्री जी के करीबी नेताओं में हैं. रामेश्वर महतो जी आपकी याददाश्त थोड़ी कमजोर हो गई है ,इसलिए आपको यह नहीं पता है कि राजेश राम को जदयू से कांग्रेस में ले जाकर 2015 में विधान परिषद चुनाव जीताने मे अशोक चौधरी जी की भूमिका रही है. फिर 2022 में जब वह जदयू में आए तो उनके चुनाव में अशोक चौधरी उनके क्षेत्र में जाकर लगातार मिहनत किए। आप सिर्फ अपने फायदे के लिए कुशवाहा-कुशवाहा रट रहे हैं. जब एक कुशवाहा का बेटा तारापुर से चुनाव लड़ रहे थे उस समय आप अपने टैक्स वाले नेता जी का पीआर कर रहे थे. लेकिन डॉ अशोक चौधरी लगातार तारापुर में कैंप करके कुशवाहा के बेटा को विधानसभा तक पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका अदा की.  कभी मौका मिले तारापुर के विधायक राजीव कुशवाहा जी से पूछियेगा कि उनको टिकट दिलाने से लेकर उनके जीत तक में अशोक चौधरी की क्या भूमिका रही है। 

रामेश्वर महतो जी आप अपनी सदस्यता खत्म होने की बेचैनी में जिस तरह की टिप्पणी डॉ अशोक चौधरी के बारे में कर रहे हैं उससे उनके व्यक्तित्व पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है, क्योंकि मेरे जैसे अनेकों अति साधारण राजनीतिक कार्यकर्ता को राजनीति की मुख्यधारा में लाने का काम डॉ अशोक चौधरी लगातार करते रहे हैं. वे जिस दल में रहते हैं उस दल को दिन-रात मजबूत करने के लिए काम करते हैं। यही कारण है कि जब वह कांग्रेस में थे तब वहां के शीर्ष नेतृत्व के अति प्रिय थे .आज जब जदयू में है तो यहां भी नेता नीतीश कुमार जी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन बाबू के करीबी नेताओं में शामिल हैं। 

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