जदयू ने केंद्र सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप, कहा बिहार से अधिक यूपी और एमपी के लोगों को दिया गया ऋण

जदयू ने केंद्र सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप, कहा बिहार से अधिक यूपी और एमपी के लोगों को दिया गया ऋण

PATNA : जदयू के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक झा ने बिहार सरकार के प्रति मोदी सरकार की भेदभावपूर्ण रवैये को उजागर करते हुए कहा कि कोविड के दौरान केंद्र सरकार द्वारा ठेले-खोमचे वालों के रोजगार के लिए प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर योजना के तहत अलग-अलग राज्यों के 29,19,799 लोगों को ऋण दिया। जिसमें से बिहार के मात्र 47,198 गरीबों को यह ऋण दिया गया, जो कुल ऋण का मात्र 1.6% है, जबकि बिहार में देश की 8.58% जनसंख्या निवास करती है। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में 8 लाख से भी अधिक, मध्य प्रदेश में लगभग 5 लाख, गुजरात और महाराष्ट्र में लगभग 2 लाख लोगों को यह ऋण दिया गया। 


बिहार की तुलना में उत्तर प्रदेश की जनसंख्या दुगुनी भी नहीं है, लेकिन वहां ऋण बिहार से 17 गुना से भी अधिक लोगों को दिया गया। मध्य प्रदेश की जनसंख्या बिहार की जनसंख्या की लगभग आधी है, लेकिन वहां बिहार की तुलना में 10 गुना से भी अधिक लोगों को ऋण दिया गया। यहाँ तक कि गुजरात और महाराष्ट्र जैसे अन्य भाजपा शासित प्रदेशों में भी बिहार से 4 गुना से भी अधिक लोगों को ऋण दिया गया। यह गौर करने वाली बात है कि कोविड के दौर में बिहार में एनडीए की सरकार थी, लेकिन इसके बावजूद बिहार के गरीबों के साथ अन्याय किया गया। यह भाजपा और मोदी सरकार की बिहार, बिहारियों और नीतीश कुमार के प्रति घृणित और भेदभावपूर्ण मानसिकता का परोक्ष उदाहरण है।  

उन्होंने कहा की नीतीश कुमार को धोखा देने वाला भाजपा का चिराग मॉडल तो चुनाव के साथ खत्म हो गया था, लेकिन बिहार की जनता को धोखा देने वाली भाजपा का बिहार विरोधी चरित्र लगातार जारी है। दूसरी तरफ बिहार एवं बिहार के लोग देश के प्रति अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से पूरा करते रहे हैं। यही कारण है कि बिहार के जिन लोगों ने यह ऋण लिया था, उसमें से 83% लाभार्थी इस ऋण को पिछले साल ही वापस कर चुके हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में मात्र 77% लाभार्थियों ने अब तक ऋण वापस किया है। 

जब ऋण के दूसरी क़िस्त देने की बारी आई तो यहाँ भी बिहार के साथ भेदभाव किया गया। दूसरी क़िस्त के तहत बिहार के 47,198 में से मात्र 1073 लाभार्थियों को ही ऋण दिया गया, जो कि कुल लाभार्थियों का मात्र 2.27% है। जबकि उत्तर प्रदेश में ऋण की दूसरी क़िस्त प्राप्त करने वाले लाभार्थियों का अनुपात 5.24%, गुजरात में 9.46% एवं  मध्य प्रदेश का 10.12% है।  

इसका मतलब यह हुआ कि जिस बिहार के गरीब ऋण वापस करने के मामले में यूपी से आगे रहे, उस बिहार के गरीबों को मोदी सरकार ने दूसरी क़िस्त देने में धोखेबाजी की और जिस उत्तर प्रदेश के लाभार्थी ऋण वापस करने में कोताही करते रहे उन्हें बिहार से भी ज्यादा प्राथमिकता दी गई।  इसे बिहारियों के प्रति मोदी सरकार की नफरती मानसिकता नहीं तो और क्या कहेंगे ? उपरोक्त आंकड़े पिछले साल एक आरटीआई के जवाब में मोदी सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराया गया था ।

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