जिन अपराधियों को भेजना चाहिए जेल उनसे बिहार पुलिस थाने से ही कह रही है कि घर जाइये..आखिर क्यों?

जिन अपराधियों को भेजना चाहिए जेल उनसे बिहार पुलिस थाने से ही कह रही है कि घर जाइये..आखिर क्यों?

PATNA : बिहार में कोरोना का कोहराम मचा रखा है. आये दिन 12 हज़ार से अधिक कोरोना के नए मामले सामने आ रहे हैं. वहीँ कई लोगों की इस महामारी से जान भी जा चुकी है. तेजी से बढ़ते संक्रमण के कारण अस्पतालों में न बेड मिल रहे हैं और किसी तरह अस्पताल में भर्ती हो गए तो ऑक्सीजन मिलना मुश्किल हो रहा है. इसकी वजह से राज्य सरकार की ओर से कई गाइडलाइन जारी किये गए हैं. जिसके तहत अब राज्य में दुकानों को शाम के चार बजे तक ही खोलने का आदेश जारी किया गया है. साथ नाईट कर्फ्यू को शाम छः बजे से लागू कर दिया गया है. इस बीच बिहार पुलिस भी कोरोना भी कोरोना से सुरक्षा के मन्त्र को अपना रही है. अपराधियों को भी संक्रमण से बचाना है. ऐसे में बिहार पुलिस सात साल से नीचे की सजा के तहत आने वाले अपराध में शामिल लोगों को सिर्फ हिदायत और बॉन्ड भरवाकर थाने के स्तर से ही छोड़ रही है. कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए किया जा रहा है. 

एडीजे मुख्यालय जितेंद्र कुमार ने बताया कि आदतन अपराधी या जिनके बारे में केस आइओ ऐसा मानते हैं कि वह सुबूत के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं अथवा गवाह को डराएंगे धमकाएंगे उनके लिए कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. उनकी गिरफ्तारी की जा रही है साथ ही कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है. इसके इतर सात से नीचे की सजा के तहत आने वाले अपराध में शामिल लोगों को सिर्फ हिदायत और बॉन्ड भरवाकर थाने के स्तर से ही छोड़ रही है. जितेंद्र कुमार ने कहा कि राज्य में कोरोना की चेन तोड़ने के लिए हर तरह की कोशिशें की जा रही हैं. ऐसे में संक्रमण को देखते हुए बिहार पुलिस ने भी अपनी रणनीति बदली है. इस व्यवस्था का आदेश सभी जिलों के एसपी को जारी कर दिया गया है. 

बताते चलें की ऐसा पहली बार नहीं किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट की ओर से यह आदेश जारी किया गया है की सात साल या सात साल के कम की जिसकी सजा रहे उसे सीआरपीसी 41-A का नोटिस उसको छोड़ देना है. लेकिन यह उनके लिए मान्य नहीं होगा विशेष कानून के तहत गिरफ्तार होते हैं या साक्ष्य या गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं. 


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