लखीसराय बड़हिया स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव को लेकर आमरण अनशन जारी, जब तक मांगे पूरी नहीं होती है तब तक आमरण अनसन जारी रहेगा

लखीसराय बड़हिया स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव को लेकर आमरण अनशन जारी, जब तक मांगे पूरी नहीं होती है तब तक आमरण अनसन जारी रहेगा

लखीसराय: लखीसराय बड़हिया स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव को लेकर आमरण अनशन जारी है डेढ़ सौ सालों से भी पुराना अंग्रेजों के समय का रेलवे स्टेशन बड़हिया जहां से लगभग 60 गांव की 400000 आबादी वाला इकलौता रेलवे स्टेशन बड़हिया आवागमन के लिए एकमात्र विकल्प है यहां से ट्रेनों का ठहराव हटाकर लोगों के साथ भारतीय रेलवे का सौतेला पूर्ण व्यवहार साफ दिखाई देता है. 

विदित हो कि 1 जनवरी 2021 को यहां के युवाओं द्वारा रेल मंत्री सहित उच्चाधिकारियों को भी यह सूचना दी गई थी कि अगर 16 जनवरी 2021 तक पूर्व से रुक रही ट्रेनों का ठहराव बड़हिया रेलवे स्टेशन पर नहीं होता है तो हम लोगों के द्वारा इसके विरोध में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन किया जाएगा.जिलाधिकारी लखीसराय संजय कुमार ने इस पर पहल करते हुए महाप्रबंधक पूर्व मध्य रेल हाजीपुर, मंडल रेल प्रबंधक पूर्व मध्य रेल दानापुर, मंडल रेल प्रबंधक पूर्व रेल मालदा को इसकी सूचना पत्रांक 2 दिनांक,02, 01, 2021 के माध्यम से पत्र लिखकर इसकी सूचना दे दी.

जिलाधिकारी लखीसराय की पहल के बाद पूर्व मध्य रेलवे के एडीआरएम श्री विभूति बी गुप्ता ने पत्र जारी कर बताया कि 3 जनवरी 2021 पत्रांक 510 के माध्यम से रेलवे बोर्ड को इसकी सूचना दे दी गई है जिसमें लखीसराय जिलाधिकारी और माननीय सांसद श्री गिरिराज सिंह के द्वारा भी ट्रेनों के ठहराव के लिए अनुरोध किया गया है.

3 जनवरी के बाद 14 दिन बीत जाने के बाद भी रेलवे बोर्ड द्वारा ट्रेनो का ठहराव नहीं दिया गया जिससे आक्रोशित होकर यहां के युवाओं द्वारा अनिश्चितकालीन आमरण अनशन किया जा रहा है.आंदोलन किसी भी राजनीतिक पार्टी के विरोध अथवा समर्थन में नहीं है आंदोलन सिर्फ सत्ता में बैठे शिर्ष नेतृत्व के संवेदनहीनता के विरुद्ध है आंदोलन गैर राजनीतिक और रेल सुविधाओं से वंचित किए गए आम लोगों के द्वारा किया जा रहा है.

आंदोलन में आर्मी ऑफिसर शिवदूत कुमार उर्फ गुड्डू जी मौजूद है जिनका एक दुर्घटना में पैर टूट गया उसके बाद भी वह आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं वह कहते हैं कि आत्मा जो होती है वह आत्मबल देती है, मेरा पैर टूटा है मैं नहीं टूटा हूं ,ऐसी चाहे कितनी भी सर्द रातें आए, कितनी भी मुश्किलें आए जब तक हमारे मुद्दे हासिल नहीं हो जाते हम लोग यहां से नहीं हटेंगे.

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