सुशील मोदी पर ललन सिंह का पलटवार, 'छपास रोग से बुरी तरह ग्रसित हैं सुशील मोदी, कोर्ट का आदेश भी नहीं पढ़ते'

सुशील मोदी पर ललन सिंह का पलटवार, 'छपास रोग से बुरी तरह ग्रसित हैं सुशील मोदी, कोर्ट का आदेश भी नहीं पढ़ते'

पटना. बिहार में निकाय चुनाव को लेकर एक बार फिर सियासी बयानबाजी शुरू हो गयी है। दरअसल, निकाय चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पहले भाजपा के सुशील मोदी ने नीतीश सरकार पर हमला बोला, तो अब जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी सुशील मोदी पर पलटवार किया है। उन्होंने सुशील मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि सुशील मोदी छपास रोग से ग्रसित हो गये हैं। वे कोर्ट के आदेश को भी ठीक से नहीं पढ़ते हैं।

सुशील मोदी पर पलटवार करते हुए जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने ट्वीट किया, 'आप छपास रोग से बुरी तरह ग्रसित हैं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश भी नहीं पढ़ते हैं। आदेश का कंडिका 4 पढ़ लें। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अति पिछड़े वर्ग के आयोग के गठन पर रोक नहीं लगाई है बल्कि आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के समर्पित आयोग के गठन पर रोक लगाई है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र करते हुए सुशील मोदी ने नीतीश सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि नगर निकाय चुनाव में राजनैतिक पिछड़ेपन की पहचान हेतु सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ट्रिपल टेस्ट हेतु एक डेडिकेटेड इंडिपेंडेंट कमीशन बना बनाया जाना था, लेकिन नीतीश कुमार ने अति पिछड़ा आयोग को ही डेडिकेटेड आयोग धिसूचित कर दिया। इसमें अध्यक्ष सहित सभी सदस्य जेडीयू-आरजेडी के वरिष्ठ नेता थे।

सुशील मोदी ने कहा कि भाजपा यह मांग कर रही थी कि किसी सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में कमीशन गठित किया जाए ताकि वह निष्पक्ष पारदर्शी बिना भेदभाव के काम कर सकें। जेडीयू-आरजेडी समर्थित आयोग द्वारा जल्दबाजी में रिपोर्ट दाखिल करने के चक्कर में संपूर्ण निकाय क्षेत्र का सर्वे करने के बजाय नगर निगम में 7, नगर परिषद में 5 एवं नगर पंचायत में मात्र 3 वार्ड में ही सर्वे का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि पटना नगर निगम में 75 वार्ड है, लेकिन मात्र 7 वार्ड और वह भी मात्र 21 प्रगणक द्वारा कराया जा रहा है। कमीशन को सभी ओबीसी का सर्वे कर उसमें राजनैतिक पिछड़ापन के आधार पर रिपोर्ट देनी थी, लेकिन केवल ईबीसी का ही वह भी आधा अधूरा सर्वे कराया जा रहा था। उन्होंने कहा कि बनाया गया आयोग ना तो पारदर्शी था और ना ही निष्पक्ष था। इन्हीं सब कारणों से न्यायाधीश सूर्यकांत और जे.जे. महेश्वरी की खंडपीठ ने ईबीसी कमीशन को डेडिकेटेड कमीशन के रूप में अधिसूचित करने पर 28 नवंबर को रोक लगा दी।

सुशील मोदी ने कहा कि संविधान की धारा 243 (U) में निकाय की पहली बैठक से 5 वर्ष की अवधि तक ही निकाय का कार्यकाल होगा। निकाय का चुनाव अवधि पूरे होने के पूर्व या भंग होने के 6 माह के भीतर कराए जाने का संवैधानिक प्रावधान है। लेकिन बिहार में बड़ी संख्या में निकायों का चुनाव एक-डेढ़ वर्ष से लंबित है। नीतीश कुमार की जिद के कारण बिहार का निकाय चुनाव कानूनी दांवपेच में फंस गया है। तेजस्वी यादव नगर विकास मंत्री हैं, लेकिन उन्हें अति पिछड़ों एवं विभाग से दूर-दूर तक कोई मतलब नहीं है।


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