दिवंगत एमएलसी केदारनाथ पाण्डेय के पुत्र आनंद पुष्कर लड़ेंगे चुनाव, कहा पिता के अधूरे 'संकल्प' को करेंगे पूरा

दिवंगत एमएलसी केदारनाथ पाण्डेय के पुत्र आनंद पुष्कर लड़ेंगे चुनाव, कहा पिता के अधूरे 'संकल्प' को करेंगे पूरा

PATNA : दिवंगत एमएलसी और शिक्षक नेता केदारनाथ पांडे के पुत्र आनंद पुष्कर अब शिक्षकों की लड़ाई लड़ेंगे। बता दें कि पुष्कर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से एमएलसी प्रत्याशी होंगे। चुनाव की तैयारी आनंद पुष्कर ने शुरू कर दी है। उन्होंने अपने पिता केदारनाथ पांडे को याद करते हुए कहा कि 2022 का जो यह साल रहा। हमारे लिए सही नहीं रहा। हमारे भाई और पिता दोनों का साथ छूट गया। हम अभी बहुत बड़े संकट से गुजर रहे हैं। हमारे पिताजी के साथ जुड़े हुए जो भी साथी हैं। उन्होंने मुझे सम्बलता प्रदान की। मेरे मनोबल को बढ़ाया। 

उन्होंने कहा की खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बहुत मदद किया। हर जगह हर कदम पर हमारे साथ रहे। वहीँ बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव शत्रुध्न प्रसाद सिंह ने बहुत ही मदद किया। हमारे पिताजी से उनका 40- 50 वर्षों का संबंध रहा है। परिवारिक रुप में भी और सामाजिक रूप में भी बहुत मदद किया और हमेशा मेरे साथ रहे। पिता जी के गुजर जाने के बाद शिक्षा जगत में एक शून्यपन आ गया है। उसकी पूर्ति करने के लिए हमारे शिक्षक साथियों ने कहा कि हम चाहते हैं कि बिहार विधान परिषद में आप आइए और जो हमारे नेता केदारनाथ पांडे का जो अधूरा सपना है। उसको आप के माध्यम से हम लोग पूरा कराना चाहते हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से भी इस बात को कहा गया और हमारे गार्जियन बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव ने भी कहा कि आप चुनाव की तैयारी कीजिए। क्योंकि हम लोगों ने संकल्प लिया है कि हमारे पांडे जी फिर से बिहार विधान परिषद में आए और उनका नाम वहां बना रहे। शिक्षकों ने 2026 तक हमारे पिताजी को बिहार विधान परिषद में भेजा था। शिक्षकों के जो अधूरे सपने रह गए हैं। जो उनका संकल्प था इसको पूरा कराने के लिए लगातार प्रयासरत थे। 

आनंद पुष्कर ने बताया की सबसे बड़ी बात है कि 2017 में उन्होंने लॉन्ग टर्म प्लान बना था। जिसमें शिक्षकों को पंचायती राज से अलग करके और राज्यस्तरीय दर्जा दिलाने की बात कही गई थी। उसमें हमारे पिता लगे हुए थे। शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा मिल जाता तो बहुत अच्छी बात हो जाती। शिक्षक सरकार के कर्मचारी हैं। लेकिन पंचायती व्यवस्था के अंदर आते हैं तो बहुत सारी परेशानियां उनको होती है। दूसरी सबसे बड़ी बात यह थी उनकी लड़ाई जारी थी। उन्होंने कहा था कि बहुत शिक्षकों की सेवा में बहुत सारी विसंगतियां हैं। 2020 में कोरोना काल मे जो हड़ताल हुआ था। उसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षकों के वेतन में 15% का बढ़ोतरी भी किया था। शिक्षकों की एक बड़ी जीत भी हुई थी। मुख्यमंत्री के द्वारा उन्हें लाभ दिया गया था। लेकिन उसमे कुछ त्रुटियां रह गई थी। जिसे पूरा करने का एक अवसर मिला है। हाई स्कूल के हमारे शिक्षक हैं। उनका वेतन विसंगति के कारण प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों से भी कम रह गया है। इस विसंगति को दूर करना हमारे पिताजी के लिए चुनौती रही थी। वित्त रहित जो शिक्षक साथी हैं। उन्हें अनुदान समय पर नहीं मिल पाने के चलते जीविकोर्जन में बहुत समस्या आ जाती थी। इसके लिए हमारे पिताजी लगातार बिहार विधान परिषद में सवाल उठाते रहे। सड़क से लेकर सदन तक शिक्षकों की आवाज उठाते रहे। शिक्षण संस्थानों को अनुदान दिया जाए। इसके लिए लगातार प्रयासरत थे और लगे हुए थे। और भी बहुत सारी उन की मांग को पूरा करना और कराना हम लोगों का संकल्प है। शिक्षक समाज ने मिलकर यह संकल्प भी लिया है की जब यह सारा काम पूरा कर लेंगे। तभी हमारे पांडे जी को श्रद्धांजलि मिलेगी। 

आनंद पुष्कर ने कहा की हमेशा पिता जी एक ही बात बोलते थे कि जितने भी शिक्षक समाज के लोग हैं। उनको आप कभी नहीं छोड़िएगा। क्योंकि उनके लिए ही मैं हूं। उन्हीं के साथ वह अपना जीवन भी जीते थे। शिक्षक के साथ ही उठना शिक्षक के साथ ही बैठना उनकी समस्याओं को लगातार समाधान कराना उनकी सोच होती थी। और हमको भी लगातार इस बात से अवगत कराते थे कि आप शिक्षक समाज को कभी नहीं छोड़िएगा। शिक्षकों का जो वाजिब अधिकार है। उसको हम दिलाने का प्रयास करेंगे। अभी बिहार में महागठबंधन की सरकार है और सात पार्टिया मिलकर सरकार चला रही है। सभी से पिता जी का सम्बन्ध अच्छा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कहा कि पांडे जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी। जब आप चुनाव लड़े।

वंदना शर्मा की रिपोर्ट 

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