चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व छठ नहाय-खाय के साथ आज से शुरू

चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व छठ नहाय-खाय के साथ आज से शुरू

छठ पूजा को मन्नतों का त्योहार कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। आज यानि 9 अप्रैल से शुरू हो रहा छठ पूजा उत्सव 12 अप्रैल तक चलेगा. इस महापर्व की पूजा चार चरणों में संपन्न होती है. साल में दो बार आने वाले इस त्योहार को सिर्फ बिहार व यूपी नहीं बल्कि विदेश में भी मनाया जाता है। चैत और कार्तिक महीने की षष्टी को मनाए जाने वाला ये छठ व्रत लोगों की जिंदगी में खुशियों और उनकी आस्था का प्रतीक है. आज छठ पूजा का पहला दिन नहाय खाय है.

व्रत को करने के पीछे कई मान्यता और पौरणिक कथा प्रचलित है. जिसके तहत कहा जाता है कि देवासुर लड़ाई में जब देवता हार गए तो देव माता अदिति ने पुत्र प्राप्ति के लिए देव के जंगलों में मैया छठी की पूजा अर्चना की थी। इस पूजा से खुश होकर छठी मैया ने आदित्य को पुत्र को पुत्र दिया और उसके बाद छठी मैया की देन इस पुत्र ने सभी देवतागण को जीत दिलाई। तभी से मान्यता चली आ रही कि छठ मैया की पूजा-अर्चना करने से सभी दुखों का निवारण होता है। 

इसके अलावा एक और कथा प्रचलित है। जिसके अनुसार कहा माना जाता है कि माता सीता ने भी सूर्य देवता की अराधना की थी। इस कथा के अनुसार कहा जाता है कि भगवान श्री राम और माता सीता जब 14 वर्ष का वनवास काट कर लौटे थे तब माता सीता ने इस व्रत को किया था। द्वापर युग में द्रौपदी, कर्ण और भीष्म पितामह ने भी छठ किया था.

चार दिनों तक चलने वाले छठ पर्व की शुरुआत ‘नहाय खाय’ से हो गई। सुबह घर की पूरी सफाई करने के बाद व्रत करने वाली महिलाओं ने स्वच्छ होकर शुद्ध शाकाहारी भोजन बनाया। इसके बाद स्नान और पूजा-अर्चना के बाद कद्दू व चावल के बने प्रसाद को ग्रहण किया। नहाय खाय के दुसरे दिन खरना किया जाता है और व्रती सूर्य की अराधना और छठी मैया की पूजा कर गुड और दूध मिश्रित खीर, रोटी बनाती हैं और इसे ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत करती हैं. 

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