एमजे अकबर मानहानि केस में कोर्ट ने प्रिया रमानी को किया बरी, कहा - प्रतिष्ठा सम्मान से बड़ी नहीं

एमजे अकबर मानहानि केस में कोर्ट ने प्रिया रमानी को किया बरी, कहा - प्रतिष्ठा सम्मान से बड़ी नहीं

नई दिल्ली। देश से प्रसिद्ध पत्रकार एमजे अकबर द्वारा महिला पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ दर्ज मानहानि के केस में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। मामले में कोर्ट ने प्रिया रमानी को बरी कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि 'किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा की सुरक्षा किसी के सम्मान की क़ीमत पर नहीं की जा सकती है.'

एडिशनल चीफ़ मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट रवींद्र कुमार पांडे दोनों पक्षों की मौजूदगी में एक ओपन कोर्ट में यह फ़ैसला सुनाया.  अदालत ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा यौन शोषण आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को ख़त्म कर देता है.  सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि महिला को दशकों बाद भी शिकायत देने का हक है. कोर्ट ने प्रिया रमानी और गज़ाला वहाब की दलील को फैसले में पढ़ा जिसमें कहा गया कि अकबर के रुतबे के डर की वजह से प्रिया रमानी और गज़ाला वहाब ने भी वर्क प्लेस पर हरेंसमेट के खिलाफ कोई शिकायत नही दर्ज कराई, पीड़ित को कई साल तक यह नहीं पता था कि उसके साथ क्या हो रहा है.

कोर्ट ने आगे कहा, ‘महिला को अपने साथ हुए अपराध के बारे में कभी भी और कहीं भी अपनी बात रखने का अधिकार है, दशकों के बाद भी महिला अपने साथ हुए अपराध के खिलाफ आवाज उठा सकती है. महिला को यौन शोषण अपराध के खिलाफ आवाज उठाने पर सज़ा नही दी जा सकती है.

क्या था पूरा मामला

साल 2018 में मीटू अभियान के दौरान पत्रकार प्रिया रमानी (Journalist Pria Ramani) ने पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एमजे अकबर के खिलाफ शोषण का आरोप लगाया था. रमानी ने आरोप लगाया था कि करीब 20 साल पहले जब अंग्रेजी अखबार के अकबर संपादक थे तो उन्होंने इंटरव्यू के दौरान उनका शोषण किया था. आरोप लगने के बाद 17 अक्टूबर 2018 को अकबर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. झूठे आरोपों का हवाला देकर इस मामले के बाद एमजे अकबर ने प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था.


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