‘पत्नी से बलात्कार’ को अपराध नहीं मानती है मोदी सरकार, क्यों बताया पश्चिम से अलग है भारतीय संस्कार

‘पत्नी से बलात्कार’ को अपराध नहीं मानती है मोदी सरकार, क्यों बताया पश्चिम से अलग है भारतीय संस्कार

दिल्ली. देश के प्रगतिशील तबके की ओर से पत्नी से बलात्कार यानी मैरिटल रेप को लेकर पति को सजा दिलाने की मांग लम्बे समय से की जाती रही है. लेकिन, अब केंद्र सरकार ने साफ साफ कह दिया है कि पत्नी से बलात्कार जैसा कुछ होता ही नहीं है. यानी केंद्र सरकार का मानना है कि ‘पत्नी से बलात्कार’ को हम अपराध की श्रेणी में नहीं रख सकते हैं. 

केंद्र सरकार ने इसके लिए अपने रोचक तर्क भी कोर्ट के समक्ष पेश किए हैं. दिल्ली हाई कोर्ट में मैरिटल रेप से जुड़ीं जनहित याचिकाओं का विरोध करते हुए केंद्र के अधिवक्ता ने कहा कि पत्नी से रेप को आपराधिक माना जाए या नहीं, इसे लेकर आंख मूंदकर पश्चिमी देशों की राह पर नहीं चल सकते हैं. सरकार की ओर से साफ तौर पर कहा गया कि आखिर यह प्रमाणित करने का क्या तरीका हो सकता है कि किसी व्यक्ति की पत्नी कब सेक्स के लिए सहमत थी और कब उसे सेक्स बलात्कार लगने लगा. यह दो लोगों की निजी जिंदगी का मसला है जिसमें भारत की सामाजिक-पारिवारिक परिस्थितयों की तुलना पश्चिम के देशों से नहीं की जा सकती है. 

केंद्र ने कहा कि कि पत्नी ने कब सेक्स के लिए सहमति वापस ले ली यह प्रमाणित करना मुश्किल है. ऐसे मसले में हमें सावधानी से कोई भी नियम-कानून तय करना चाहिए. केंद्र ने अपनी दलील में दहेज उत्पीड़न से जुड़ी आईपीसी की धारा 498 के दुरुपयोग का भी हवाला दिया कि कैसे 498 के कई मामले फर्जी होते हैं. 

पश्चिम के देशों में पत्नी से बलात्कार पर तय कानून को भारत की स्थिति से नहीं जोड़ने की वकालत की गई. भारत में विवाह की सामाजिक मान्यताएं और इसे लेकर प्रचलित धारणाओं का भी केंद्र ने हवाला दिया. साथ ही देश की महिलाओं की स्थिति, उनकी साक्षरता, समाज की सोच, महिलाओं की आर्थिक स्थिति आदि का हवाला देते हुए केंद्र ने साफ तौर पर कहा कि हम पश्चिम देशों का अंधानुकरण नहीं कर सकते हैं. 

हालाँकि केंद्र ने कहा कि एक दंपत्ति के बीच के विवाद को घरेलू हिंसा के तौर पर परिभाषित किया जा सकता है या इसे 'सेक्सुअल एब्यूज' कहा जा सकता है. इसे किसी भी हालत में पत्नी से बलात्कार मानना सही नहीं है क्योंकि किसी भी कानून में पत्नी से रेप को परिभाषित नहीं किया गया है. इसके पूर्व केंद्र सरकार ने 2017 में भी कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था जिसमें कहा गया था कि मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता. उसे ही एक बार फिर केंद्र ने दोहराया है. 


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