'प्रसाद' की तरह बंटा सहनी वोट! मुकेश सहनी बंटवारे को नहीं रोक सके, 'भूमिहारों' ने स्वजातीय कैंडिडेट की बजाय BJP प्रत्याशी को किया पसंद

'प्रसाद' की तरह बंटा सहनी वोट! मुकेश सहनी बंटवारे को नहीं रोक सके, 'भूमिहारों' ने स्वजातीय कैंडिडेट की बजाय BJP प्रत्याशी को किया पसंद

PATNA: बिहार विधानसभा की कुढ़नी सीट पर हुए उप चुनाव में बीजेपी ने सत्ताधारी जेडीयू को चारो खाने चित्त कर दिया। भाजपा प्रत्याशी केदार गुप्ता ने दिलचस्प मुकाबले में जेडीयू प्रत्याशी मनोज कुशवाहा को 3649 मतों से हराया. बीजेपी प्रत्याशी को जहां 76722 मत मिले वहीं जेडीयू प्रत्याशी को 73073 वोट प्राप्त हुए। इस तरह से सत्ताधारी गठबंधन की सारी ताकत भी कुढ़नी जीतने में नाकामयाब रही। वीआईपी चीफ मुकेश सहनी के उम्मीदवार निलाभ कुमार तीसरे नंबर पर रहे. वीआईपी के उम्मीदवार को 10 हजार मत मिले। उप चुनाव में सहनी समाज के वोट में बंटवारा हो गया। कुढ़नी में मुकेश सहनी का जादू नहीं चला। वे बोचहां की तरह सहनी वोटरों को अपने पक्ष में कराने में विफल रहे। न मुकेश सहनी का अपने समाज में जादू चला और न इनके कैंडिडेट निलाभ का भूमिहारों समाज के वोटरों में.

सहनी वोटरों को पाले में लाने में विफल रहे मुकेश सहनी 

कुढ़नी में भूमिहारों की अच्छी संख्या है। सहनी समाज के वोटरों की तादाद भी अच्छी है। इस बार सहनी-मल्लाह समाज के दो कैंडिडेट मैदान में थे. वहीं तीसरा कैंडिडेट मुकेश सहनी के निलाभ कुमार थे। निलाभ भूमिहार समाज से आते हैं, लेकिन वीआईपी चीफ ने इस बार बड़ा दांव खेला था। उन्होंने भूमिहार समाज से आने वाले निलाभ कुमार को मैदान में उतार कर बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की। अगड़ी जाति से उम्मीदवार देने पर मुकेश सहनी को अपने समाज की नाराजगी का भी सामना करना पड़ा। लाख कोशिश के बाद भी वे अपने समाज को एक प्लेटफार्म पर नहीं ला सके। सहनी समाज का वोट प्रसाद की तरह बंट गया। आप इसी से अंंदाजा लगा लीजिए कि इस समाज के एक निर्दलीय प्रत्याशी शेखर साहनी को 3716 मत मिले। वहीं राष्ट्रीय जन संभावना पार्टी के उपेंद्र सहनी को 1090 वोट मिले। वहीं सहनी समाज के वोट में बीजेपी ने भी सेंध लगाई। इसमें भाजपा को सफलता भी मिली। मुकेश सहनी के उम्मीदवार नीलभ कुमार को भी सहनी-मल्लाहों का कुछ फीसदी वोट मिला। लेकिन खुद को सन ऑफ मल्लाह कहने वाले मुकेश सहनी अपने समाज के वोट बिखराव को रोक न सके। मुकेश सहनी न तो अपने समाज का पूर्व वोट दिला सके और न निलाभ कुमार ही अपने स्वाजातीय वोट को लेने में कामयाब रहे। पढ़े-लिखे और राजनीतिक रूप से काफी जागरूक माने जाने वाले भूमिहार वोटरों ने स्वजातीय निलाभ की बजाय बीजेपी को पसंद किया। यही वजह है कि वीआईपी कैंडिडेट 10 हजार पर सिमट गये। भूमिहार समाज के मुट्ठी भर वोटरों को छोड़ दें तो अधिकांश लोगों ने भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया। 

जानें किस प्रत्याशी को कितने वोट मिले 

बीजेपी कैंडिडेट केदार प्रसाद गुप्ता को 76722 मत मिले। जेडीयू के मनोज कुमार सिंह को 73073 वोट. राष्ट्रीय जन संभावना पार्टी के उपेंद्र साहनी को 1090, काली कांत झा को 1245, नीलाभ कुमार को 10000, एआई एम आई एम के मोहम्मद गुलाम मुर्तजा को 3206, आदर्श मिथिला पार्टी के संजय ठाकुर को 373, सुखदेव प्रसाद को 886, निर्दलीय आलोक कुमार सिंह को 410, दिनेश कुमार राय को 764, विनोद कुमार राय को 833, शेखर साहनी को 3716 ,संजय कुमार को 4250 और नोटा को 4448 मत मिले.


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