नमामि गंगे का हाल बुरा : लाश मिलने के बाद बदल गया है पानी का रंग, स्थानीय लोगों को सताने लगा है संक्रमण का डर

नमामि गंगे का हाल बुरा :  लाश मिलने के बाद बदल गया है पानी का रंग, स्थानीय लोगों को सताने लगा है संक्रमण का डर

BUXER : बिहार के बक्सर जिले के चौसा सहित अन्य घाटों पर 10 मई को गंगा नदी में तैर रहे सैकड़ों लाशों का  साइड इफेक्ट दिखने लगा है। पिछले दिनों मोक्षदायिनी गंगा नदी में लगातार शव उत्तर प्रदेश के तरफ से प्रवाहित गंगा की जलधारा में आने के बाद सरकारी सिस्टम में बैठे लोग इसे उत्तर प्रदेश एवं विहार का शव बता कर खुद को बचाने में लगे हुए थे। लेकिन अब किसी के पास इस बात का जवाब नहीं है। वह लाशें किसकी है? हालांकि इसका दुष्प्रभाव भी अब दिखने लगा है। गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए सरकार ने 20 अरब 37 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। लेकिन हालात बद से बदतर है। पिछले दिनों यह बात सामने आई थी कि गंगा के पानी में भी संक्रमण फैल गया है। जिसको लेकर लॉकडाउन के दौरान गंगा में स्नान आदि पर रोक लगाई गई थी। लेकिन, इसी बीच लखनऊ के सीवेज कोरोना वायरस पाए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पानी में भी वायरस रह सकता है और अनंत काल तक जिंदा रह सकता है। गंगा नदी के पानी की शुद्धता की जांच के लिए बिहार राज्य प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों ने पानी के नमूने का संग्रह पिछले दिनों किया गया। बक्सर के विभिन्न गंगा घाटों के साथ-साथ भोजपुर और पटना में भी पानी के नमूने संग्रहित कर जांच के लिए भेजा गया है। गंगा का पानी जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि पूरा मामला क्या है। 

बदल गया गंगा के पानी का रंग, लोगों ने कहा पहले नहीं हुआ कभी ऐसा

 बताते चलें कि पिछले कुछ दिनों से गंगा नदी के पानी का रंग भी बदलकर हरा दिखने लगा है। ऐसा लग रहा है कि जैसे नदी के जल पर हरे रंग की काई लगी हो। वहीं स्थानीय विनोद पांडे ने बताया कि मैं पिछले 22 वर्षों से देख रहा हूं इस तरह गंगा का पानी ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। बाहरी लोग स्नान कर लेते हैं, मगर स्थानीय लोग स्नान नहीं करते। उन्हें वायरस का डर सता रहा है। वहीं स्थानीय पंडा अमरनाथ पांडे ने बताया कि लोग गंगा मां को श्रद्धा से बिना स्नान किए जल छिड़क लेते हैं, उन्हें वायरस का डर सता रहा है। 

उन्होंने बताया कि आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ जिस तरह आज गंगा का पानी हरा हो चुका है। जब से गंगा में शव मिला है तभी से पानी का रंग बदल चुका है। मैंने अपने जीवन काल में इस तरह का पानी कभी नहीं देखा, लोगों को डर सता रहा है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए लखनऊ स्थित प्रयोगशाला में जल का नमूना भेजा गया है। अपनी जांच में वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि इस संक्रमण के चलते मौत होने के बाद यदि किसी व्यक्ति का शव गंगा में बहाया गया हो तो क्या उससे पानी दूषित हुआ है, या पानी दूषित होने का कोई और भी कारण है। 

 


बता दें कि पिछले दिनों भारी संख्या में लोगों ने गंगा नदी में शवों को प्रवाह किया था, जिसके बाद देश के साथ साथ पुरे विश्व में भी यह चर्चा का विषय बन गया था। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा शवों को निकालकर दफना दिया गया था। बाद में काफी हो-हल्ला होने के बाद अब शवों को गंगा में प्रवाह करने का सिलसिला भी अब बंद हो गया है। इसी बीच गंगा के पानी का रंग बदल गया जिसने सभी को चिंता में डाल दिया है। जैसा दिख रहा है चौसा के रानी घाट पर जानवर भी पानी पीने से कतरा रही है। वही रामरेखा घाट पर कुछ ही लोग स्नान करते देखे जा सकते हैं। बक्सर के अधिकारियों से संपर्क करने पर कोई अधिकारी इस मामले पर बोलने को तैयार नहीं और ना ही बक्सर में प्रदूषण बोर्ड का कोई कार्यालय है। जिले वासियों को भी इस बात की चिंता सताने लगा है कि गंगा नदी में तैर रहे सैकड़ों लाशे करोना संक्रमण से मरने वाले लोगों की थी। तो फिर गंगा नदी में जल स्वच्छ कैसे होगा। बल्कि जल का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। जिस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा।

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