नवरात्र विशेष : माँ मुंडेश्वरी मंदिर में दी जाती है रक्तविहीन बलि, तोड़ने में नाकाम रहा औरंगजेब

नवरात्र विशेष : माँ मुंडेश्वरी मंदिर में दी जाती है रक्तविहीन बलि, तोड़ने में नाकाम रहा औरंगजेब

KAIMUR : नवरात्र का आज दूसरा दिन है। मंदिरों में श्रद्धालूओं की भीड़ उमड़ी है। ख़ासकर देवी मंदिरों में पूजा अर्चना का दौर लगातार जारी है। ऐसे में कैमूर जिले में स्थित में स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर में भक्तों का ताँता लगता है। कहा जाता है की इस मंदिर को तोड़ने का प्रयास औरंगजेब ने किया था, लेकिन मंदिर को तोड़ने में वह कामयाब नहीं हो सका। बताया जाता है की उसने मंदिर को तोडवाने के लिए मजदूरों को लगाया। 


लेकिन मंदिर तोड़ने में लगे मजदूरों के साथ अनहोनी होने लगी तो वे भाग गए। नवरात्र के मौके पर पूरे देश के लोग शक्ति की अधिष्‍ठात्री देवी दुर्गा की आराधना कर रहे हैं। कैमूर जिले में स्‍थि‍त मां मुंडेश्‍वरी धाम में लोगों की भीड़ देखी जा रही है। भगवानपुर प्रखंड के पवरा पहाड़ी पर स्थित करीब 2100 साल पुराना ये मंदिर नागर शैली वास्‍तुकला का नमूना है। शारदीय नवरात्र में यहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। 

रामनवमी और महाशिवरात्रि में रक्‍तविहीन बलि दी जाती है। ये प्रक्रिया देखकर लोग अचरज में पड़ जाते हैं। बता दें की यहाँ बलि किसी जीव की हत्या कर नहीं दी जाती है। बकरे पर केवल मंदिर के पुजारी अक्षत मार देते हैं। जिससे बकरा कुछ देर के लिए बेहोश हो जाता है। 

होश में आने के बाद इसे बलि मान लिया जाता है। मंदिर तक जाने के लिए अब रास्ते का निर्माण किया जा चूका है। लेकिन ऊँची पहाड़ी पर होने के बावजूद खुद के वाहन से भी लोग इस मंदिर तक पहुँच सकते हैं। आज बिहार ही नहीं अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहाँ माँ मुन्देश्वरी के दर्शन करने आते हैं।

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