नवरूना हत्याकांड जांच में सीबीआई फेल, 40 पेज की फाइनल रिपोर्ट विशेष कोर्ट में दाखिल, 4 दिसंबर को अंतिम होगी अंतिम सुनवाई

नवरूना हत्याकांड जांच में सीबीआई फेल, 40 पेज की फाइनल रिपोर्ट विशेष कोर्ट में दाखिल, 4 दिसंबर को अंतिम होगी अंतिम सुनवाई

डेस्क... मुजफ्फरपुर का चर्चित नवरूना हत्याकांड में अब सीबीआई ने अपने हाथ खड़े कर लिए हैं। 17 सितंबर 2012 की रात जवाहरलाल रोड निवासी अतुल्य चक्रवर्ती की छोटी बेटी नवरूना रहस्यमय तरीके से कमरे से गायब हो गई। इसे लेकर पिता ने 18 सितंबर 2012 को नगर थाने में अपहरण का केस कराया। इसके बाद 14 फरवरी 2014 से पहले पुलिस और सीआईडी ने इसकी जांच की। इसके बाद सीबीआई जांच शुरू की, लेकिन सात साल तक छानबीन करने के बाद अब सीबीआई को भी मायूसी ही हाथ लगी है। देश के शीर्ष एंजेसी सुराग ढूंढ़ने में सफल नहीं हो सकी है। 

बता दें कि नवरुना के घर से सटे एक नाला से कंकाल भी मिला था। जिसे तत्काल नवरूना का कंकाल बताया गया था। इस मामले में सीबीआई ने 15 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। साथ ही 250 से अधिक को नोटिस देकर कैंप कार्यालय व क्षेत्रीय कार्यालय में बुलाकर मामले में तफ्तीश की। सुराग नहीं मिलने के बाद 10 लाख रुपए का इनाम की भी घोषणा की थी।

अब सीबीआई ने 13 नवंबर को सबूत व तथ्य का अभाव बताते हुए मुजफ्फरपुर के विशेष कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी है। सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट से इस केस का रहस्य और अधिक गहरा गया है। दर्जनों वैज्ञानिक जांच के बावजूद सीबीआई किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। कांड के जांच अधिकारी सह डीएसपी अजय कुमार ने 40 पेज की फाइनल रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट के साथ ही जांच बंद हो गई है।

रिपोर्ट में जांच के 86 बिंदुओं को उल्लेखित किया गया है। नवरूना के घर के पास से नाले से बरामद कंकाल को लेकर भी सीबीआई खुलासे में फेल रही। कुल 66 लोगों की गवाही भी काम नहीं आ सकी। नगर थाने के तत्कालीन थानेदार जितेंद्र प्रसाद, वार्ड पार्षद राकेश कुमार सिन्हा पप्पू, मोतीपुर निवासी विमल अग्रवाल समेत आधा दर्जन संदिग्धों की ब्रेन मैपिंग, लाइव डिटेक्टर, नार्को टेस्ट व बयान आदि से भी कोई साक्ष्य हासिल नहीं हो सका। इसके अलावा डीएनए व बोन टेस्ट भी बेनतीजा रहा। जांच के दौरान सीबीआई की ओर से गिरफ्तार किए गए आधा दर्जन संदिग्धों पर भी आरोप पुष्ट नहीं हो सके। अब चार दिसंबर को विशेष कोर्ट में सुनवाई के लिए तिथि तय है। 

पुलिस समेत तीन जांच एजेंसी विफल
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 14 फरवरी 2014 को सीबीआई ने कांड में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार जांच के लिए मोहलत दी। जिला पुलिस के बाद मामले की जांच का जिम्मा सीआईडी को भी सौंपा गया था। तीनों एजेंसी कांड के खुलासे में फेल रही।


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