उम्मीदवारों का दस्ता तैयार, अब बस सीट व टिकट कंफर्म होने का इंतजार, नवादा में होगा बड़ा मुकाबला

उम्मीदवारों का दस्ता तैयार, अब बस सीट व टिकट कंफर्म होने का इंतजार, नवादा में होगा बड़ा मुकाबला

NAWADA : नामांकन की तैयारी प्रशासनिक स्तर पर लगभग पूरी हो जाने के बाद भी नवादा का चुनावी परिदृश्य अभी साफ नहीं हो पाया है. राजनीतिक हलके में चर्चे जरूर परवान पर हैं कि कौन सा परिदृश्य उभर कर सामने आने वाला है लेकिन फिलहाल सभी इंतजार में ही हैं. हालांकि यह प्रतीक्षा थोड़ी लम्बी हो रही है, जिससे धैर्य चूक भी रहा है.  

बहरहाल वर्तमान में सीटों को लेकर स्थिति है वह एनडीए के पक्ष में है. जिले के पांच में से चार सीटों पर फिलहाल एनडीए का कब्जा है. नवादा में जदयू तथा हिसुआ और वारिसलीगंज में भाजपा के विधायक हैं. गोविंदपुर सीट अब कांग्रेस से जदयू में आ चुकी है. जदयू पिछले चुनाव में राजद-कांग्रेस के साथ था. फिलवक्त चार-एक की स्थिति को एनडीए जहां और बेहतर बनाने की कोशिश में जुटा दिख रहा है, वहीं महागठबंधन इस बार ठोकपीट कर उम्मीदवार देने की तैयारी में है, ताकि पिछले चुनाव की तरह बेहतर परिणाम दिया जाए. 

हिसुआ सीट पर कई दिग्गजों की नजर

जिले की हॉट सीट हिसुआ पर पिछले तीन बार से भाजपा के विधायक हैं. भाजपा का हक मानकर जदयू और लोजपा के स्तर पर कहीं से कोई भी सुगबुगाहट तक नहीं दिख रही है. यानी वर्तमान विधायक का टिकट कन्फर्म माना जा रहा है. इस सीट पर नजर गड़ाए बैठे महागठबंधन के सर्वेसर्वा एक ऐसा उम्मीदवार देना चाहते हैं जो वर्तमान विधायक को बराबरी का टक्कर दे सके. इसके लिए दावेदारी उस जाति के खाते में जाता दिख रहा है जिसका यहां प्रभावी वोट है. साथ ही एमवाई के समीकरण का लाभ लेने की भी सोच है. इसी आधार पर विरोधी उम्मीदवार तय होना निश्चित माना जा रहा है. 

नवादा सीट पर रहेगा जदयू का दावा

सबसे बड़ा मुकाबला नवादा सीट हैं. लेकिन जदयू के वर्तमान विधायक का दावा बनता ही बनता है. राजद की अपने हाथ से उपचुनाव में फिसल गए इस सीट को फिर से हथियाने की जोर-आजमाइश भी तय है. ऐसे में यहां से राजद उम्मीदवार को टिकट मिलना तय माना जा रहा है. उम्मीद है कि गत विजेता रहे विधायक के किसी परिजन को टिकट मिले. महागठबंधन इस स्थिति को ही टक्कर की मान कर चल रहा है. 

वारिसलीगंज सीट पर भाजपा की दावेदारी

वारिसलीगंज सीट पर भाजपा की दावेदारी मानी जा रही है. सिटिंग सीट की नीति के आधार पर उनका हक माना जा रहा है. ऐसे में जदयू की कोई दावेदारी की बात सामने नहीं आ रही है. महागठबंधन से इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार दिए जाने की चर्चा जोर-शोर से है. एक खास जाति के प्रभावी वोट के कारण इसी समुदाय से उम्मीदवार दिए जाने की संभावना जताई जा रही है.  

गोविंदपुर सीट पर इस बार जदयू का दावा

कांग्रेस से जदयू में आयी वर्तमान विधायक का टिकट जदयू से तय माना जा रहा है. हालांकि पिछली बार यह सीट भाजपा के खाते में था. लेकिन इस बार परिस्थितियां बिल्कुल बदली हुई हैं. महागठबंधन ने पिछली बार कांग्रेस को यह सीट दी थी, लेकिन इस बार राजद के खाते में यह सीट जाना तय माना जा रहा है. रालोसपा छोड़ कर राजद में आए एक नेता के पिछले प्रदर्शन के बाद उनका मैदान में आना लगभग तय है. यहां एमवाई समीकरण समेत अगड़ी-पिछड़ी वोट को टार्गेट करने की सोच महागठबंधन की है.  

रजौली सुरक्षित सीट राजद के लिए रहेगी सुरक्षित

रजौली सुरक्षित सीट महागठबंधन के घटक दल राजद और वर्तमान विधायक के लिए सुरक्षित माना जा रहा है.  हालांकि राजद से कई लोग उम्मीदवारी देने की तोड़-जोड़ में दिख रहे हैं. लेकिन उनकी बात बनती नजर नहीं आ रही है. इस बीच एनडीए के घटक दल भाजपा के खाते में रहे इस सीट पर जदयू व लोजपा की उम्मीदवारी को लेकर भी खूब चर्चे हैं. 

बागियों के आने भी जताई जा रही संभावना

विधानसभावार इस नजारे के अलावा इस बात पर भी राजनीतिक प्रेक्षकों की नजर लगी है कि टिकट की घोषणा होते ही कई बागी भी चुनाव मैदान में आ सकते हैं. हालांकि इस बात की भी चर्चा है कि मूल पार्टी से कट कर यह कटी पतंग की तरह यह बेदम ही साबित होंगे. लेकिन इतना तय है कि बागियों की जमात भी अपन दखल दिखाएगी. 

इस बार सभी विधानसभा क्षेत्र पर राजद भी चाह रही है अपने प्रत्याशी को खड़ा करना. वही उन्हीं के खेमा के कांग्रेस पांचो विधानसभा पर अपने प्रत्याशी उतारना की कोशिश में है. अब देखना यह है कि इन सभी में कब किसको कितना सीट मिलता है. लेकिन सबसे बड़ी बात तो यह है कि कई निर्दलीय पार्टी भी इस बार महागठबंधन व एनडीए को करारी हार हराने की कोशिश में जुटे हुए हैं. 

नवादा से अमन सिन्हा की रिपोर्ट

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