नवादा में 107 शिक्षकों की जाएगी नौकरी, फर्जी तरीके से हुए हैं बहाल

 नवादा में 107 शिक्षकों की जाएगी नौकरी, फर्जी तरीके से हुए हैं बहाल

Nawada: जिले के वारिसलीगंज प्रखंड में द्वितीय चरण 2008 के फर्जी रिक्ति पर 2018 में नियुक्त हुए 107 शिक्षकों की नौकरी जानी तय हो गई है. इस बावत जिला शिक्षा पदाधिकारी ने वहां के बीडीओ को पत्राचार किया है. नियोजन को अवैध बताते हुए कार्रवाई करने को कहा गया है. संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को भी पत्र भेजा गया है. जिसमें संबंधित शिक्षकों से काम नहीं लेने और भविष्य में किसी प्रकार का वित्तीय बोझ बढ़ने पर खुद जवाबदेह होने का कहा गया है. पत्र से साफ है कि अवैध बहाल शिक्षकों को विभाग शिक्षक मानने को तैयार नहीं है.

बता दें कि जिला अपीलीय प्राधिकार नवादा के केवल 07 शिक्षकों की नियुक्ति के आदेश के आलोक में 107 शिक्षकों की नियुक्ति प्रखंड नियोजन इकाई वारिसलीगंज के द्वारा 2018 में कर दी गई थी. नियुक्त शिक्षकों को वेतन भुगतान नहीं हो रहा था. तब बिपिन कुमार, रजनीकांत सिन्हा, कुमारी सिधु रानी, शिवबालक प्रसाद यादव, नवीन कुमार, शत्रुघ्न प्रसाद तथा कमलेश चौधरी द्वारा उच्च न्यायालय में वेतन भुगतान को ले याचिका दायर किया गया था. कोर्ट के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी नवादा ने 12 फरवरी 20 को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) तथा वारिसलीगंज के बीईओ से 2018 में किए गए नियोजन संबंधी अभिलेखों यथा 2008 के नियोजन संबंधी रोस्टर, मेधा सूची, आवेदन प्राप्ति पंजी, कार्यवाही पंजी आदि को जमा करने को कहा. संबंधित अधिकारियों की उदासीनता को देख डीईओ के स्तर से गहन छानबीन की गई.

द्वितीय चरण 2008 में नियोजन से वंचित अनुष्का रानी, रजनीकांत, प्रियंका कुमारी प्रियदर्शिनी, सलुजा कुमारी, कुमारी सिधु रानी समेत कुल सात शिक्षकों ने शिक्षक नियोजन अपीलीय प्राधिकार से नियुक्ति नहीं करने की शिकायत की थी. वारिसलीगंज प्रखंड नियोजन इकाई द्वारा पहले पत्र में द्वितीय चरण में रिक्ति शून्य बताई गई. बाद में नियोजन इकाई के अनुसार 107 सीट रिक्त कहा गया था. जिसके आलोक में 03 सीटों को अनुकंपा के आधार पर भरा गया. शेष 104 रिक्त सीटों पर अवैध तरीके से प्रखंड नियोजन इकाई 2018 में नियुक्ति कर लिया. 

इस नियुक्ति में मेधा की जगह लाभ आधार बना. जिसके तहत नियोजन में शामिल तब के कई प्रखंड से लेकर जिला स्तर के कई अधिकारियों के रिश्तेदारों का भी नियोजन हुआ. अब जब वेतन भुगतान का मामला लटकने लगा तब वर्तमान अधिकारियों के कान खड़े हुए. डीईओ स्तर से जांच में उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देकर नियुक्त शिक्षकों के वेतन भुगतान की मांग को स्थगित कर दिया गया. वारिसलीगंज के जानकार कहते हैं कि अगर तीनों चरण के शिक्षक नियोजन को निष्पक्षता पूर्वक किसी एजेंसी से जांच करवाई जाए तो बहुत लोगों की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी. साथ ही नियोजन इकाई की गर्दन फंसनी तय है. हालांकि तत्कालीन जिलाधिकारी कौशल कुमार ने उक्त नियोजन की जांच के लिए अनुमंडल अधिकारी को निर्देशित किया था.

डीईओ संजय कुमार चौधरी ने कहा है कि पूरी प्रकिया ही अवैध है, नियोजन इकाई को अवगत करा दिया गया है. शिक्षकों को हटाने का काम नियोजन इकाई का है. संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को भी इन शिक्षकों से काम नहीं लेने को कहा गया है. नियोजन प्रक्रिया में शामिल तब के पदाधिकारियों के बारे में भी उच्च अधिकारियों को लिखा जाएगा.

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