बेगूनाहों की जान लेनेवाले नक्सलियों को भी है कोरोना का खौफ, कैंप लगवाकर करवाया वैक्सीनेशन, इन राज्यों से उपलब्ध कराई गई दवा

बेगूनाहों की जान लेनेवाले नक्सलियों को भी है कोरोना का खौफ, कैंप लगवाकर करवाया वैक्सीनेशन, इन राज्यों से उपलब्ध कराई गई दवा

DESK : कोरोना महामारी का खौफ कैसा है, यह इस बात से ही समझा जा सकता है कि आम लोगों के साथ नक्सलियों ने डर के कारण वैक्सीनेशन करवाया है। इसके लिए बकायदा नक्सलियों द्वारा कैंप लगाया गया, जहां सभी को कोरोना का वैक्सीन लगाया गया। 

इस बात की पुष्टि तब हुई जब छत्तीसगढ़ की दंतेवाड़ा पुलिस के सामने खूंखार नक्सली दंपति ने सरेंडर कर दिया। सरेंडर करने वालों में पोज्जा उर्फ संजू माड़वी पामेड़ एरिया कमेटी के प्लाटून नंबर 9 का कमांडर है, जबकि उसकी पत्नी तुलसी माड़वी पामेड़ एरिया कमेटी की सदस्य और DVC सुरक्षा दल की कमांडर है. पति और पत्नी दोनों पर ही 5-5 लाख रुपये का इनाम था। इस दंपति ने पुलिस के सामने ऐसे ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्हें जानने के बाद पुलिस भी हैरान रह गई। 

वैक्सीनेशन के लिए लगाया गया कैंप

इसी साल सितंबर 2021 में शादी करनेवाले इस दंपति ने बताया कि  कोरोना से बचने के लिए संगठन में वैक्सीनेशन का अभियान भी चलाया गया था. सारी वैक्सीन पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश और तेलांगना से उपलब्ध हुई और उनके स्वास्थ्य कर्मियों ने वैक्सीन की दोनों डोज नक्सलियों को लगाई गई। 

छत्तीसगढ़ में तेलगु लोगों का बढ़ रहा है दबदबा

बताया गया दोनों पति-पत्नी 100 से ज्यादा जवानों की हत्या की घटना में शामिल थे. साथ ही मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों के AK-47 समेत अन्य हथियारों को लूट कर इकट्ठा करने की जिम्मेदारी इन्हीं की रहती थी। महिला नक्सली तुलसी ने बताया उनके पति पोज्जा को चार बार गोलियां भी लगी हैं. नक्सलियों की डॉक्टर टीम ने इलाज कर जान तो बचा ली, मगर इलाज के बाद वो 15 मिनट से ज्यादा खड़ा नहीं रह सकता है. इस वजह से नक्सली इसकी उपेक्षा करने लगे थे। इसके साथ जो सबसे बड़ी बात उन्होंने बतायी कि छत्तीसगढ़ के संगठन में ज्यादा तेलुगू नक्सलियों का दबदबा हो गया था. इसलिए दोनों ने सरेंडर करने का फैसला लिया. 


अप्रैल में टेकलगुड़ा में 22 जवानों की मौत का खोला राज

सरेंडर करनेवाले नक्सल दंपति ने इस साल अप्रैल में सुकमा और बीजापुर सीमा पर स्थित टेकलगुड़ा गांव में 22 जवानों की मौत से जुड़े प्लान के बारे में भी बताया है। नक्सली दंपति ने बताया कि टेकलगुड़ा की घटना को अंजाम देने के लिए पहले से कोई प्लानिंग नहीं बनी थी. दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के लीडर हिडमा और संगठन के कई बड़े लीडर जंगल में बैठे हुए थे. इसी बीच संगठन के मिलिशया सदस्यों ने वॉकी-टॉकी से हिडमा को जानकारी दी कि भारी संख्या में फोर्स जंगल में घुस रही है. वो टेकलगुड़ा की तरफ ही आ रहे हैं. खबर मिलने के बाद हिडमा ने वहां मौजूद 450 नक्सलियों को इकट्ठा किया. फिर 10 मिनट तक बात कर सभी से कहा - 'मौका मिला है सफलता चाहिए।'

जवानों की उतार ली थी वर्दी

पोज्जा ने बताया कि नक्सली ऊंचाई वाली जगह पर छिप गए थे. सर्चिंग करते हुए जवानों को आगे जंगल में और अंदर घुसने दिया गया. जब टेकरी की ओर पहुंचे तो चारों तरफ से घेर लिया गया. फिर जवानों पर गोलियां चलाई गईं. फोर्स पूरी तरह से एंबुश में फंस गई थी। एनकाउंटर के बाद जवानों के पास से सारे हथियार लेकर इकट्ठा कर रहे थे. पति-पत्नी ने बताया कि इस बड़े हमले को अंजाम देने गांव के ही 25 से 30 सदस्य मौजूद थे. उनमें से कुछ लोगों ने वर्दी उतार ली थी. जिसके बाद लूटी हुई वर्दी को पहन रहे थे।

एक जवान को बनाया था बंधक, बाद में छोड़ दिया

पति-पत्नी ने बताया कि  इस बीच एक जवान भी जिंदा मिला था. दूसरी पार्टी ने उसे पकड़ लिया था. उसके पास से हथियार भी ले लिए थे. जवान को हिडमा के पास लेकर गए थे. कई दिनों तक हिडमा, सुजाता और कई बड़े लीडरों ने पूछताछ की थी. बड़े लीडरों ने छोड़ने का निर्णय लिया. फिर जम्मू के उस जवान को रिहा किया गया



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