NEW DELHI : शहाबुद्दीन के आरटीपीसीआर रिपोर्ट पर बवाल, मौत की जांच के लिए परिजन खटखटा सकते हैं हाईकोर्ट का दरवाजा

NEW DELHI : शहाबुद्दीन के आरटीपीसीआर रिपोर्ट पर बवाल, मौत की जांच के लिए परिजन खटखटा सकते हैं हाईकोर्ट का दरवाजा

NEW DELHI : उम्र कैद की सजा काट रहे सीवान के पूर्स सांसद मो. शहाबुद्दीन की मौत को लेकर राजनीतिक बवाल मच गया है। जहां राजद सहित दूसरी पार्टी के नेता उनकी मौत को साजिश करार देते हुए इसकी जांच की मांग की है। वहीं अब पूर्व सांसद के परिजनों ने भी साफ कर दिया है कि वह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाएंगे। बताया जा रहा है कि वह सोमवार को इस मामले में याचिका दायर कर सकते हैं।  

दरअसल, अब तक यह कहा जा रहा था कि शहाबुद्दीन की मौत कोरोना संक्रमण के कारण हुई है, लेकिन रविवार को पूर्व सांसद की जो आरटीपीसीआर रिपोर्ट सामने आई है, उसको लेकर जेल प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि सांसद शहाबुद्दीन की RT-PCR टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आयी है यानि उन्हें कोरोना नहीं था।

शव दफनाने पर लगी रोक, सीवान लाया जा सकता है शव

RT-PCR टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उनके शव को दफनाने से रोक दिया गया है शहाबुद्दीन के परिजनों ने उनकी मौत में बड़ी साजिश होने का आरोप लगाते हुए कोर्ट जाने का एलान कर दिया है। शहाबुद्दीन के परिजनों ने यह मांग की है कि यह स्पष्ट हो गया कि उन्हें कोरोना नहीं था, ऐसे में उनके शव को दिल्ली में दफनाने की जगह उनके पैतृक गांव सीवान के प्रतापपुर ले जाने की अनुमति दी जाए।इससे पहले कोर्ट ने कोरोना प्रोटोकॉल के तहत उनका अंतिम क्रिया कर्म करने के निर्देश दिया था। 

RT-PCR रिपोर्ट को लेकर हाईकोर्ट में होगी अपील

हाईकोर्ट में वरीय अधिवक्ता सलमान खुर्शीद शहाबुद्दीन के परिजनों की ओर से पक्ष रखेंगे. शहाबुद्दीन के परिजनों की पहली मांग ये होगी कि अगर उनकी कोरोना से मौत नहीं हुई तो फिर मौत के सही कारणों का पता लगाया जाये. आखिरकार कैसे उन्हें कोरोना पॉजिटिव बताकर कोरोना वार्ड में भर्ती किया गया औऱ कोरोना का इलाज किया गया. दरअसल शहाबुद्दीन के परिजनों ने पहले भी आरोप लगाया था कि उन्हें जब जेल के अलग वार्ड में रखा जा रहा था तो कोरोना कैसे हो गया था.

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