नीतीश कुमार ने कहा- बिहार के किसान परेशान नहीं, वहीं बिहार के किसानों ने खोल दी पोल, जानिए दावे की हकीकत को....

नीतीश कुमार ने कहा- बिहार के किसान परेशान नहीं, वहीं बिहार के किसानों ने खोल दी पोल, जानिए दावे की हकीकत को....

डेस्क... देश में एक और किसान आंदोलन चल रहा है तो वहीं दूसरी और बिहार के किसान खेतों में फसलों को तैयार कर रहे हैं। बिहार में धान तैयार है। अब इसे किसान फैक्स के जरिए बेच रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जब किसानों के समस्याओं को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बाहर जो भी चल रहा हो, लेकिन हमारे यहां किसान को कोई समस्या नहीं है। यहां सरकार की तरफ से धान की खरीदी तेजी से हो रही है। 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो कह दिया कि बिहार के बाहर जो भी चल रहा हो, लेकिन बिहार में किसानों को कोई दिक्कत नहीं है तो हम आपको बता तें किसानों को बिहार में कैसी समस्याएं रही हैं। कुछ दिनों पहले आपने सुना ही होगा कि कैसे मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर के किसानों अपने गोभी की फसल को जमींदोज कर दिया था। इतना ही नहीं मधेपुरा में पारंपरिक खेती को छोड़कर सुगंधित पौधे या औषधियों की खेती करने वाले किसानों उपज की उचित कीमत नहीं मिलने के कारण किसानों को परेशानी हुई। 

केस 1

पहले आते हैं जहां जहानाबाद के राजेंद्र यादव ने बताया कि धान में भी इस बार कोई लाभ नहीं हुआ है, जबकि किसान की मानें तो एक ऐसा पंचायत है जहां 8 गांव है और उस गांव में मात्र 5 आदमी का रजिस्ट्रेशन हुआ है। अब आप ही बताइए कि हम लोग अपना धान किसको बेचेंगे।  अब 6 आदमी को पूरा करेंगे या हमारा भी गल्ला लेंगे। वहीं रजिस्ट्रेशन नहीं होने के मामले पर किसानों ने कहा है कि कोई बताता ही नहीं है कि किस तरह से रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। 

केस 2

वहीं हरिलाल प्रसाद ने बताया कि यहां पर किसान जो है, चाहे धान हो, गेहूं हो, मक्का हो, गन्ना हो या फिर अन्य फसल हो वो ओने-पौने दाम या छोटे-मोटे दुकानदार को बेचते हैं या फिर बिचौलियों के पास बेचते हैं। सरकार के पास जो पैक्स की व्यवस्था है कभी सही ढंग से हम लोगों को अनाज नहीं लेता है। अगर लेता भी है तो उसी बिचौलियों के भाव से लेता है, जिस ओने-पौने दाम पर बिचोलिए लेते हैं और वह भी पैसा में दो-तीन महीने के बाद मिलता है। अगर हमको कल जरूरत पड़ेगा कि हमें बेटी की शादी करनी है तो हमें समय पर पैसा नहीं मिलता है। 

मुख्यमंत्री ने कुछ दिन पहले बयान दिया था कि किसानों को कोई समस्या नहीं है। अब किसानों ने भी अपना जवाब दे दिया है। नीतीश सरकार की व्यवस्था को लेकर भी किसानों की राय हमने आपको बता दिया है। अब आप ही को तय करना है कि बिहार के किसानों को दिक्कत है या नहीं सरकार चाहे जितने भी दावे कर ले लेकिन जमीनी हकीकत किसानों से किसी से छुपी नहीं है। 

गौरतलब है कि जहां एक तरफ किसान सड़क पर उतर आए हैं, वहीं बिहार से कुछ तस्वीरें ऐसी भी आ रही है, जो यहां के सरकार को जाननी बहुत जरूरी है। दिल्ली से दूर बिहार के किसानों को मंडी में अपने फसल की उचित कीमत नहीं मिलने से उन्हें अपने ही हाथों में फसल को बबार्द करना पड़ा है। 

समस्तीपुर में गोभी की फसल को रौंदा था

समस्तीपुर जिले के मुक्तापुर गांव के किसान ओम प्रकाश यादव ने कड़ी मेहनत से तैयार की गई अपनी ही गोभी की फसल फसल को अपने ही हाथों उजाड़ दिया। ओमप्रकाश ने 4000 प्रति एकड़ के हिसाब से गोभी की खेती की थी, लेकिन मंडी में गोभी एक रुपए किलो भी नहीं बिका। उपज की उचित कीमत नहीं मिलने की बात ओमप्रकाश को इतना कचोटा कि उन्होंने अपने ही हाथों तैयार की गई गोभी की फसल को खेत में ट्रैक्टर चला कर नष्ट कर दिया। उन्होंने बताया कि हम मंडी में ले जाते थे, उसके बाद ही बिक नहीं रहा था। उसके ऊपर लेबर खर्चा और डीजल खर्चा बहुत हो रहा था। बुरा लगता था। सरकार ध्यान देती नहीं है।

आपको बता दें कि यह हाल जिले में ओम प्रकाश यादव के साथ ही नहीं है। ऐसा हाल दूसरे किसानों के साथ भी है। हर कोई अपनी फसल का उचित दाम नहीं मिलने से परेशान है। अन्य किसानों ने बताया कि सरकार हम लोगों पर कोई ध्यान नहीं देता है। हम लोगों की ओर से बाजार में ले जाए सामान की कोई बेहतर कीमत नहीं देता है, इसीलिए मजबूरी में जाकर आत्महत्या किसान कर लेते हैं। 

परंपरागत खेती में नहीं मिला कोई लाभ

मधेपुरा जिले के मानिकपुर गांव में परंपरागत खेती से हटकर सुगंधित पौधे या औषधियों की खेती करने वाले किसानों के सामने कई चुनौती है। गेहूं, धान और मक्का उपजाने के बाद भी उपज की उचित कीमत नहीं मिलने के कारण किसानों को परेशानी होती थी। कृषि विभाग और कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जिले के प्रगतिशील किसानों ने खस, मेंथा व अन्य सुगंधित औषधीय पौधों की खेती शुरू की। उन्हें बताया गया कि इनकी खेती पारंपरिक खेती से कई गुना ज्यादा लाभकारी होगा। किसानों ने भी उत्साह दिखाया और कई एकड़ में खेती की, लेकिन जब फसल तैयार हुई तब बाजार में खरीदार नहीं मिले। अब सरकार से सुगंधित फसलों के मूल्य निर्धारण करने की मांग कर रहे हैं। 

पटना से मदन कुमार की रिपोर्ट

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