नीतीश सरकार पर जमकर बरसे राजद विधायक चेतन आनंद, कहा मेरे जीवन का पहला FIR हुआ, वह भी झूठा

नीतीश सरकार पर जमकर बरसे राजद विधायक चेतन आनंद, कहा मेरे जीवन का पहला FIR हुआ, वह भी झूठा

JAMUI : समाजवादी चिंतक डॉ. राममनोहर लोहिया ने कभी कहा था "सड़कें जब सूनी होती हैं, तब संसद आवारा हो जाता है". संघी फ़ासिस्टों की गोद में बैठे फर्जी सोशलिस्ट और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोहिया की ही जयंती पर बिहार को पुलिसिया राज बनाने वाले विधेयक का विरोध करने वाले आंदोलनकारियों पर बेरहमी से लाठी चलवाकर और सदन के अंदर 'रेपिड एक्शन फोर्स ' घुसाकर महिला -पुरुष विधायकों को घसीट -घसीट कर पिटवा कर यह साबित कर दिया कि बिहार सरकार तानाशाह और निरंकुश हो गयी है. ये बातें शिवहर से आरजेडी विधायक व सन 74 आंदोलन की उपज पूर्व सांसद आनंद मोहन के पुत्र चेतन आनंद ने शनिवार को स्थानीय परिसदन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही. 

उन्होनें कहा कि आश्चर्य तो यह है कि उल्टे दंगे के चार्ज में मुझ सहित 21 विधायकों, पार्टी नेताओं और 800 से अधिक कार्यकर्ताओं पर संगीन धाराओं के तहत मुकदमें दर्ज करा दिए गए. चेतन ने कहा कि शासन में बैठे हुक्मरानों के इस गीदडभभकियों से हम डरने वाले नहीं हैं. उन्होंने कहा कि संघर्ष हमारी विरासत है, हमारी तीन -तीन पीढ़ियों के आधे दर्जन से अधिक लोगों ने स्वतन्त्रता से लेकर 'संपूर्ण क्राँति'  के संघर्ष में सक्रिय भागीदारी निभाई है. गाँधी, लोहिया, जयप्रकाश के नेतृत्व में आजा़दी और लोकतंत्र की लड़ाईयाँ लड़ी हैं. लोकतांत्रिक तरीके से हम इसका कड़ा प्रतिवाद करेंगे. आरजेडी विधायक ने कहा कि गांधी और जे पी की कर्मभूमि और जनतंत्र की जननी बिहार 23 मार्च को सड़क से सदन तक सत्ता की दमनकारी कुकृत्य पर शर्मशार है. "विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम" के पारित होने पर पुलिस की निरंकुशता की जो आशंकाएं विपक्ष से लेकर आमजन के मन में व्याप्त थीं. उसका नंगा-नाच देखकर सदन के नए सदस्य हतप्रभ थे. 

चेतन आनंद ने लोहिया जयंती और शहीदे आजम भगत सिंह की पूण्य तिथि पर लोकतंत्र के मंदिर में शासन का लंपट प्रदर्शन देखकर यह सोचने को विवश हूं कि अगर यही लोकतंत्र है, तो फिर तानाशाही क्या है ? 23 मार्च  का दिन जनतंत्र के इतिहास का 'काला दिन' था. लोकतंत्र में 'लोक' आगे और 'तंत्र' पीछे है. जब भी, जहाँ भी, तंत्र मजबूत हुआ है, लोकशाही खतरे में पड़ा है. उन्होंने कहा की बिहार सहित देश कुछ ऐसे ही दौर से गुजर रहा है. खुद को 'व्यावहारिक समाजवादी' बताने वाले नीतीश कुमार का नकली खोल उतर गया. साथ ही कुछ 'मीडिया हाऊस' का नंगापन भी. उन्होंने कहा की वक्त सबका हिसाब करता है. तोजो, नीरो, हिटलर, मुसोलिनी सबका हश्र सामने हैं. चेतन आनंद ने कहा कि महाधरना प्रदर्शन के एवज में मेरे जीवन का पहला FIR हुआ है और वो भी झूठा. नीतीश सरकार को मुझपर करवाए गए 307 (half murder) मुकदमे को लेकर बहुत बहुत बधाई. यह वही लोग हैं जिनके वजह से आज तक मेरे पिता एक झूठे मुकदमे में जेल की सलाखों के पीछे बंद हैं. बांका के मोहनपुर गांव की घटना पर बोलते हुए चेतन ने कहा कि बांका पुलिस संतोष सिंह के हत्यारे को बचा रही है. 

जमुई दौरे के क्रम में चेतन आनंद अपने शुभचिंतक चमन जी से मिलने उनके घर निमारंग पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की. साथ ही अपने पिता के साथी कटौना गांव निवासी समाजसेवी चन्द्रचुड सिंह की अस्वस्थता होने की खबर सुन उनके घर पहुंचकर कुशलक्षेम पूछा. मौके पर रविन्द्र सिंह, जितेन्द्र सिंह, रामाशीष सिंह, प्रो. प्रदीप कुमार सिंह, जितेंद्र कुमार चमन, पुरूषोत्तम सिंह आदि मौजूद थे. 

जमुई से राकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट

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