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मुस्लिम वोट बैंक पर नीतीश की नजर! RJD के 'कोर वोट' में लगेगी सेंध तो तेजस्वी को होगा बड़ा नुकसान

मुस्लिम वोट बैंक पर नीतीश की नजर! RJD के 'कोर वोट' में लगेगी सेंध तो तेजस्वी को होगा बड़ा नुकसान

पटना. बिहार में नीतीश के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार है। इस सरकार में डिप्टी सीएम राजद के तेजस्वी है। कई बार राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर चला कि राजद और जदयू का मर्ज हो जाएगा। खासतौर पर जब सीएम नीतीश ने 2025 के बिहार विधानसभा का चुनाव तेजस्वी के नेतृत्व में लड़ने का ऐलान कर दिया, तब इस अकटलों को और मजबूती मिलने लगी। हालांकि जदयू के अंदर ही मतभेद के बाद सीएम नीतीश ने जदयू की बैठक में कहा जदयू और राजद के मर्ज पर कोई बात नहीं हुई है। अब ऐसे में राजनीतिक विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि सीएम नीतीश बिहार की सियासत में चाहते क्या हैं और बिहार की राजनीति को किस ओर ले जाना चाहते हैं?

नीतीश की मुस्लिम वोट पर नजर

हाल ही में जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सीएम नीतीश ने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा था कि ललन जी के साथ मिलकर आप लोग पार्टी को आगे बढ़ाइए। कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी की आगामी रूपरेखा और पार्टी को राष्ट्रीय स्तर का दर्जा दिलाने का प्रस्ताव पास किया गया। ऐसे में सीएम नीतीश इतनी आसानी से राजद में अपनी पार्टी को मर्ज कर ले, यह संभव नहीं है। एक अटकलें और लगाई जा रही है कि नीतीश की नजर बिहार में मुस्लिम वोट पर है। हाल के कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव के परिणाम से जदयू को आभास हो गया है कि राजद का कोर वोट खासकर यादव वोट जदयू में शिफ्ट नहीं हो पा रहा है। ऐसे में जदयू को बिहार में बने रहने के लिए मुस्लिम वोट एक अहम सियासी हथियार है।

राजद को नुकसान

बिहार में मुस्लिम वोट पर राजद का दबदबा है। अधिकतर मुसलमान बिहार राजद को वोट करते हैं। ऐसे में नीतीश कुमार मुस्लिम वोट में सेंध लगाते हैं, तो इसका नकुसान सीधे तौर पर राजद को होगा। वैसे 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोट जदयू में शिफ्ट हुई थी। इसके प्रयास में नीतीश कुमार शुरू से लगे हुए थे। लेकिन बाद के दिनों में बीजेपी से गठबंधन और बीजेपी के उग्र हिन्दुत्व की वजह से जदयू से मुस्लिम वोट खिंसक गया है! अब नीतीश कुमार फिर से मुस्लिम वोट को साधने में जुटे हैं। हालांकि यह रास्ता इतना आसान भी नहीं है। एक तो बिहार में मुस्लिम वोट पर राजद की शुरुआती दौर से ही गहरी नजह है, वहीं एआईएमआईएम भी खेल बिगाड़ रही है। 2020 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम बहुल सीमांचल से एआईएमआईएम के पांच मुस्लिम विधायक बने थे। हालांकि बाद में इनमें से चार राजद में शामिल हो गये।

सीएए के समर्थन से मुस्लिम वोट खिंसका!

जदयू का मुस्लिम वोट बैंक छिटकना का एक कारण उसका इतिहास। किसी का भी इतिहास हमेशा उसके साथ चलता है। दरअसल, जदयू के सांसद ने 2020 में नागरिक संशोधन विधायक का सदन में समर्थन किया था। यह विधेयक सीधे तौर पर मुस्लिम समुदाय से जुड़ा हुआ था। तब जदयू बीजेपी के साथ एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी। उसी दौरान इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जदयू के पवन वर्मा और प्रशांत किशोर ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इसके बाद में दोनों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। हालांकि डैमेज कंट्रोल करने के लिए 2020 के विधानसभा चुनाव के दौरान किशनगंज में एक रैली को संबंधित करते हुए सीएम नीतीश ने कहा था कि किसी में दम नहीं कि सीएए और एनआरसी के नाम पर हमारे लोगों को बाहर निकाले। कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं। कौन किसे देश से बाहर निकालेगा? किसी के पास किसी को भी बाहर निकालने की शक्ति नहीं है क्योंकि सभी भारत के हैं। हमने हमेशा सद्भाव का वातावरण बनाया है और सभी को एकजुट करने का प्रयास किया।

अनुच्छेद 370 को पुनर्स्थापित करने के पक्ष में JDU

उसी प्रकार अनुच्छेद 370 जो सीधे तौर पर मुस्लिमों से नहीं जुड़ा है, लेकिन भावनात्मक रूप से है। अनुच्छेद 370 हटाये जाने के दौरान जदयू ने इसका विरोध किया था। हालांकि बाद में एनडीए गठबंधन का हिस्सा होने के नाते जदयू ने इसका समर्थन कर दिया। जदयू का कहना था कि जब कोई कानून प्रभावी होता है तो यह देश का कानून हो जाता है। सभी को इसे स्वीकार करना चाहिए। वहीं अब भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद जदयू अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध कर रही है। पार्टी के प्रवक्ता राजीव रंजन ने ट्वीट कर कहा, 'जदयू धारा 370 को पुनर्स्थापित करने की पक्षधर रही है। धारा 370 हटने से घाटी का माहौल खराब हुआ है। घाटी की समस्याओं को देखते हुए इस फैसले पर पुनर्विचार होना चाहिए और लोकतंत्र की बहाली के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने चाहिए।'

राजद के मुस्लिम नेता के समर्थन में जदयू

वहीं जदयू ने राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के बयान पर किसी प्रकार की टिप्पणी नहीं की। राजद नेता एक बयान सामने आया था, जिसमें उन्होंने अपने बेटा-बेटी से कहा था कि भारत रहने लायक माहौल नहीं है। विदेश में ही नौकरी मिल रही है, तो वहीं काम करो। हालांकि उन्होंने अपने बयान पर कायम रहते हुए स्पष्टीकरण भी दिया था। इस बयान पर जदयू ने राजद नेता के विरोध में बयान नही दिया, बल्कि उसके समर्थन में ही खड़े नजर आये। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने ट्वीट कर कहा, 'अब्दुल बारी सिद्दीकी  सांप्रदायिकता के विरुद्ध लगातार लड़ते रहे हैं। भारत की आजादी के समय हिंदू महासभा ने तत्कालीन मुस्लिम लीग के साथ मिलकर पाकिस्तान के गठन की मांग की थी।'