‘विशेष राज्य’ के नाम पर राजनीति करने वाले नीतीश अब जातीय जनगणना का झुनझुना बजाने लगे हैं

‘विशेष राज्य’ के नाम पर राजनीति करने वाले नीतीश अब जातीय जनगणना का झुनझुना बजाने लगे हैं

पटना. पूर्व लोकसभा सदस्य अरुण कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समाज सुधार यात्रा पर तंज कसते हुए कहा है कि राज्य की परेशानियों और मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ही वे इस तरह की यात्रा निकालते हैं. बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की नीतीश की मांग से उनकी पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के अलग विचार रखने पर उन्होंने कहा कि विशेष राज्य का दर्जा भौगोलिक आधार और अन्य कारणों से मिलता है. नीति आयोग की रिपोर्ट में इसके कारण स्पष्ट किए गए हैं. आरसीपी को केंद्र में रहते हुए सब समझ आ गया होगा इसलिए वे विशेष राज्य के विरोध में बोल रहे हैं. 

उन्होंने कहा कि पिछले 15 साल से नीतीश कुमार ही सत्ता में हैं. बावजूद इसके बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, अपराध, भ्रष्टाचार और रोजगार की समस्या जस की तस है. इसलिए अपनी नाकामी को छुपाने के लिए नीतीश कुमार विशेष राज्य पर राजनीति करते है. 


उन्होंने कहा कि खुद को गाँधी के विचारों पर चलने वाला बताकर बिहार में शराबबंदी लागू की गई है. लेकिन, शराबबंदी का राज्य में क्या हश्र है? उन्होंने सत्ताधारी दल के मुखिया का बिना नाम लिए कहा कि अकर्मण्य लोगों के हाथ में है बिहार की सत्ता है. जातीय जनगणना को एक राजनीतिक झुनझुना बताते हुए उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल की ओर से नकारात्मक मुद्दों को सामने लाकर गरीबों का ठगने का काम किया जा रहा है. 

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की बेरोजगारी यात्रा का समर्थन करते अरुण कुमार ने कहा कि यह यात्रा निकाली जानी चाहिए. राज्य में बेरोजगारी चरम पर है और सत्ताधारी दल का कहना है यहाँ कल-कारखाने नहीं लग सकते क्योंकि बिहार चारो ओर से जमीनी भूभाग से घिरा है. जबकि उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्य हैं जहाँ समुद्र नहीं है बावजूद इसके वहां उद्योग फलफूल रहे हैं. 

राज्य में हाल में निर्वाचित कई मुखिया आदि पंचायत प्रतिनिधियों की हत्या का उदाहरण देते हुए अरुण सिंह ने राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, सरकार को यात्रा निकालने के बदले काम करने पर ध्यान देना चाहिए. 


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