विपक्ष आक्रामक, सरकार सख्त,धवस्त हुए छह पुल-पुलिया का पुनर्निर्माण शुरु, ठेकेदारों के पैसे से होगा कंस्ट्रक्शन

पटना- बीते कुछ दिनों से बिहार में धड़ाधड़ पुल गिर रहे हैं. इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर हुई है, जिसमें कहा गया कि लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण पूरे बिहार में पुलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है, खासतौर पर बाढ़ प्रभावित इलाकों में. पुल के गिरने के बाद नीतीश कुमार ने दावा किया है कि इसके नुक़सान की भरपाई वो कंपनी करेगी, जो इसका निर्माण कर रही थी.
वहीं बिहार में पुलों के गिरने की घटनाओं के बाद नीतीश सरकार ने राज्य में पुलों के रखरखाव की नीति लागू कर दी और इसका प्रमुख डिवीजन के मुख्य अभियंता को बनाया . वहीं नीतीश सरकार ने इस मामले में कड़ रुख अपनाते हुए जल संसाधन विभाग ने 11 अभियंताओं को निलंबित कर दिया .
साल 2024 में 3-4 जुलाई को सीवान और सारण में गंडक और छाड़ी नदी पर बने छह पुल-पुलिया बह गई थी. अब इसके निर्णाण का काम शुरु हो गया है वहीं निर्माण में आने वाली लागत सरकार नहीं देगी . ये पैसा संबंधित ठेकेदारों से वसूला जाएगा. छह पुलों के निर्माण में खर्च होने वाली राशि गंडक-छाड़ी-गंडकी-माही-गंगा नदी जोड़ योजना के संवेदक को देनी होगी. साथ ही संवेदक को क्त नदी जोड़ योजना से संबंधित कोई भी भुगतान अगले आदेश तक रोक दिया गया है और अगले टेंडर में भाग लेने से वंचित कर दिया गया है.
बहरहाल पुल गिरने के मामले पर सियसत भी घूब हो रही है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा है कि पीएम मोदी की रहनुमाई और सीएम नीतीश की अगुवाई में 6 दलों वाली डबल इंजनधारी एनडीए सरकार में पुल के गिरने से जनता के स्वाहा हो रहे हजारों करोड़ को स्वघोषित ईमानदार लोग ‘भ्रष्टाचार’ ना कहकर ‘शिष्टाचार’ कह रहे हैं.”
वहीं उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि ग्रामीण कार्य विभाग के ये पुल हैं. इनकी समीक्षा की जा रही है. वो (तेजस्वी यादव) भी लंबे समय तक पथ निर्माण और ग्रामीण कार्य विभाग भी संभाले हुए थे. वो अपनी ज़िम्मेदारी से क्यों पल्ला झाड़ रहे हैं? हमारी सरकार सजग है. हम इसकी निगरानी और कार्रवाई कर रहे हैं. पुलों की तकनीक और डिज़ाइनिंग की भी जाँच कराई जाएगी
बिहार में लगातार पुल गिरने को लेकर सियासत गर्म है.