कश्मीर पर नहीं मिला किसी देश का साथ, ट्विटर पर गिड़गिड़ाने लगे पाकिस्तानी पीएम

कश्मीर पर नहीं मिला किसी देश का साथ, ट्विटर पर गिड़गिड़ाने लगे पाकिस्तानी पीएम

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने पर बौखलाया पाकिस्तान लगातार दुनिया भर का ध्यान कश्मीर मुद्दे की ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान दुनिया के सामने मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को किसी देश में तवज्जो नहीं मिल रही है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी चीन दौरे पर हैं और चीन से जम्मू-कश्मीर पर मदद मांग रहे हैं। लेकिन वहां भी पाकिस्तान को निराशा हाथ लगी है।

चारों ओर से निराशा हाथ लगते देख पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ट्विटर पर अब गिड़गिड़ाने की मुद्रा में आ गए हैं। इमरान खान ने ट्विटर पर भारत के खिलाफ झूठे आरोपों की बौछार कर दी है और कहा है कि क्या दुनिया के नेता इस बारे में कोई कदम उठाएंगे?

इमरान खान ने कहा है कि कश्मीर में कर्फ्यू है और वहां पर कश्मीरियों के साथ ज्यादती की जा रही है। इमरान खान ने दुनिया के सामने गुहार लगाते हुए कहा कि क्या वर्ल्ड लीडर्स इस मामले में कुछ पहल करेंगे। इमरान खान का आरोप है कि कश्मीर की आबादी का पैटर्न बदलने की कोशिश की जा रही है।

इमरान यहीं नहीं रुके कहा कि कश्मीर की डेमोग्रफी को चेंज करने के लिए जातीय संहार किया जा रहा है। उन्होंने दुनिया भर के देशों से अपना प्रॉपेगेंडा फैलाते हुए दखल की अपील की है। इमरान ने कहा कि क्या वैश्विक समुदाय भारत को लेकर चुप रहेगा, जैसे हिटलर के नरसंहार को लेकर चुप्पी थी। आर्टिकल 370 हटाने के लिए आरएसएस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि आरएसएस की विचारधारा हिंदू श्रेष्ठता की है। इमरान ने कहा, 'क्या नाजी आर्यन श्रेष्ठता की ही तरह जम्मू-कश्मीर में भी यह जारी रहेगा। इसके अलाव भारत के मुस्लिमों के साथ भी यही होने वाला है और उनका अगला निशाना पाकिस्तान हो सकता है।' गौरतलब है कि इससे पहले इमरान खान ने पाकिस्तान की संसद में बयान देते हुए कहा था कि आरएसएस हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए काम कर रहा है।

भारत को दुनिया के कई देशों से जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाने के फैसला का समर्थन मिल चुका है। इस फैसले पर भारत का समर्थन रूस ने भी किया था। रूस ने साफ शब्दों में कहा था कि जम्मू और कश्मीर को दो भागों में विभाजित और केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला संविधान के अनुसार ही लिया गया था। रूस ने कहा था, मॉस्को को उम्मीद है कि जम्मू-कश्मीर राज्य पर दिल्ली द्वारा लिए गए फैसले पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव में वृद्धि नहीं होगी।


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