पटनिया मौड़ी न केवल देश के अन्य राज्यों, बल्कि अमेरिका तक भेजी जाती थी; जानिए आज इसकी क्या है हालत

पटनिया मौड़ी न केवल देश के अन्य राज्यों, बल्कि अमेरिका तक भेजी जाती थी; जानिए आज इसकी क्या है हालत

पटनासिटी. बिहार की धरती अपने आप में इतिहास को समेटे हुई है। यहां बनने वाली ऐसी कई बस्तुएं हैं, जिनका अपना इतिहास रहा है और उसके लिए बिहार की धरती देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी विख्यात है। ऐसा ही एक सामान है पटनिया मौड़ी, जो शादियों में दूल्हे के माथे पर सजाया जाता है। इसकी डिमांड एक समय न केवल देश के अन्य राज्यों, बल्कि अमेरिका तक में होती थी, लेकिन अब समय के साथ-साथ सब कुछ बदल गया है।

राजधानी पटना से महज 15 किलोमीटर दूर पटनासिटी के मच्छरहट्टा स्थित है मौड़ी गली और इसी मौड़ी गली में पटना की पटनिया मौड़ी बना करती है। मौड़ी गली बिहार की सबसे बड़ी मंडी है, जहां शादियों से सम्बंधित सामान बना करता है। कहा तो यह जाता है कि ब्रिटिश काल में निर्मित यह गली आज बिहार के लिए  सबसे बड़ा सजाबट के सामानों के लिए जाना जाता है। अगर आपको शादी विवाह से जुड़ी सामग्रियां मौड़ी, माला, सुप दौरा, पटमासी, सिंधोरा एवं अन्य सामान से लेकर पूजा की सामग्रियों की जरूरत है तो आप इस मौड़ी गली में आकर खरीदारी कर सकते हैं।


दुकानदार राजकुमार चन्द्रवंशी बताते हैं कि यहां शादियों के लिए बनने वाली पटनिया मौड़ी तांबे की बना करती थी, जो हमारे पूर्वजों के समय से बनती आ रही है, लेकिन समय जैसे-जैसे परिवर्तन होता चला गया, वैसे-वैसे इस मौड़ी में भी बदलाव होता चला गया और अब यह रोलेक्स का बनने लगा। उन्होंने बताया कि हमारे चार पुस्त इस कारोबार से जुड़े रहे और आज भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि पहले के समय में इस पटनिया मौड़ी में लगने वाला कांच के बॉल अर्थात ठुमरी फिरोजाबाद से आया करता था, इसमें कांच का बॉल लगाया जाता था। लेकिन अब उसकी जगह पर प्लास्टिक के बॉल लगना शुरू हो गया।

पटनिया मौड़ी बांस की टोकरी अर्थात (पेटारी) में रखकर अमेरिका तक भेजा जाता था। साथ ही बंगाल, झारखंड, बनारस, दिल्ली सहित अन्य राज्यों में भी भेजा जाता था। लेकिन अब सब कुछ बदल गया है। महंगाई चरम पर है। समय में जैसे-जैसे बदलाव होता गया, सब चीजों में परिवर्तन होता गया। चन्द्रवंशी बताते हैं कि इस गली के हर मकान में व्यापार फलता फूलता है। इस गली में हज़ारों दुकान ऐसे हैं, जहां हर इन सभी चीजों का निर्माण दिन रात चलता है।

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