सतर्क रहें, सुरक्षित रहेः मुंबई में हजारों लोगों की जान से खिलवाड़, 9 कैंप पर लग रही थी फर्जी कोरोना वैक्सीन, सरकार ने खुद हाईकोर्ट में कबूला

सतर्क रहें, सुरक्षित रहेः मुंबई में हजारों लोगों की जान से खिलवाड़, 9 कैंप पर लग रही थी फर्जी कोरोना वैक्सीन, सरकार ने खुद हाईकोर्ट में कबूला

MUMBAI: इन दिनों देश में कोरोना वैक्सीनेशन अभियान चरम पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फ्री टीकाकरण की घोषणा के बाद से ही कोरोना वैक्सीनेशन की रफ्तार में वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि इनसब के बीच आपदा को अपने स्वार्थ के लिए अवसर बनाने वाले लोगों का कार्य भी बदस्तूर जारी है। इसका शिकार बने हैं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के लोग। मुंबई में हजारों की संख्या में लोगों को फर्जी टीका लगाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राज्य सरकार ने गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को खुद इसकी जानकारी दी।

उद्धव ठाकरे सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि मुंबई में अभी तक दो हजार से अधिक लोग फर्जी कोविड वैक्सीनेशन कैंप का शिकार हो चुके हैं। ऐसे मामलों में अभी तक पांच एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और 400 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। फर्जी वैक्सीनेशन का पहला मामला कांदिवली थाने में दर्ज किया गया था। दूसरा मामला वर्सोवा थाने में, तीसरा मामला खार पुलिस स्टेशन और चौथा मामला बोरीवली थाने में दर्ज किया गया है। कांदिवली पुलिस ने फर्जी टीकाकरण के मामल में अबतक 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इनसे पूछताछ कर आगे की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। इन लोगों ने मुंबई के अलग-अलग स्थानों पर 9 जगह वैक्सीनेशन कैंप लगाए जाने की बात कबूली थी। मालूम हो कि हीरानंदानी सोसाइटी में 30 मई को वैक्सीनेशन कैंप लगाया गया था। इसमें 390 लोगों को कोविशील्ड वैक्सीन लगाई गई। मामले में शक तब उत्पन्न हुआ जब जब एक भी लोगों में वैक्सीन का साइड इफेक्ट नजर नहीं आया। इसके बाद से ही सवाल उने लगे कि कहीं लोगों को फर्जी वैक्सीन तो नहीं लगा दी गई? सवाल इसलिए भी उठे क्योंकि वैक्सीन लगने के तुरंत बाद लोगों को सर्टिफिकेट भी नहीं मिला। चौंकाने वाली बात ये भी है कि 10 दिन बाद कुछ लोगों को सर्टिफिकेट मिलने लगे लेकिन इन पर अलग-अलग अस्पतालों का नाम था। वहीं जिन अस्पतालों के नाम से वैक्सीनेशन कैंप लगाए गए उनका कहना था कि उन्होंने सोसाइटी में ऐसा कोई कैंप ही नहीं लगाया।

इस संबंध में बॉम्बे हाईकोर्ट में बीएमसी की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील अनिल साखरे ने बताया कि इस संबंध में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को भी एक पत्र लिखा गया है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 29 जून तय की है। साथ ही राज्य सरकार और बीएमसी को आदेश दिया कि वो कोर्ट के सवालों और निर्देशों का जवाब देने के लिए हलफनामा दाखिल करें।


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