प्रणब मुखर्जी का दिलचस्प रहा राजनीतिक सफर, इंदिरा गांधी के चहेते बनने से लेकर सोनिया के लिए संकटमोचक की निभाई भूमिका

प्रणब मुखर्जी का दिलचस्प रहा राजनीतिक सफर, इंदिरा गांधी के चहेते बनने से लेकर सोनिया के लिए संकटमोचक की निभाई भूमिका

DESK : देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया है. उन्होंने दिल्ली के आर्मी अस्पताल में आखिरा सांस ली. उनके निधन के बाद पूरे राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राहुल गांधी, सीएम नीतीश कुमार समेत देश के कई नेताओं ने शोक जताया है. 

प्रणब मुखर्जी का राजनीतिक  सफर

प्रणब मुखर्जी भारत के 13वें पूर्व राष्ट्रपति थे. इससे पहले प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे. प्रणब मुखर्जी का राजनीतिक जीवन 6 दशक पुराना है. प्रणब मुखर्जी ने 1969 में राज्य सभा सांसद के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की. वे कांग्रेस का टिकट प्राप्त कर राज्यसभा के सदस्य बन गए, 4 बार वे इस पद के लिए चयनित हुए. वे थोड़े ही समय में इंदिरा जी के चहेते बन गए थे. सन 1973 में इंदिरा जी के कार्यकाल के दौरान वे औद्योगिक विकास मंत्रालय में उप-मंत्री बन गए. सन 1975-77 में आपातकालीन स्थिति के दौरान प्रणब मुखर्जीजी पर बहुत से आरोप भी लगाये गए. लेकिन इंदिरा गांधी की सत्ता आने के बाद उन्हें क्लीन चिट मिल गया. इंदिरा गांधी जी के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान प्रणब जी सन 1982से 1984 तक वित्त मंत्री के पड़ पर विराजमान रहे थे.

इंदिरा जी की मौत के पश्चात् राजीव गांधी से प्रणब जी के संबंध कुछ ठीक नहीं रहे और राजीव गाँधी ने अपने कैबिनेट मंत्रालय में प्रणब जी को वित्त मंत्री बनाया था. लेकिन राजीव गाँधी से मतभेद के चलते प्रणब दा ने अपनी एक अलग “राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस” पार्टी गठित कर दी. सन 1985 में प्रणब जी पश्चिम बंगाल कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भी रहे. थोड़े समय के बाद 1989 में राजीव गाँधी के साथ सुलह हो गई और वे एक बार फिर कांग्रेस से जुड़ गए. कुछ लोग इसके पीछे की वजह ये बोलते थे कि इंदिरा गाँधी की मौत के बाद प्रणब जी खुद को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में देखते थे, लेकिन उनकी मौत के बाद राजीव गाँधी से सब उम्मीद करने लगे. पी वी नरसिम्हा राव का प्रणब मुखर्जीजी के राजनैतिक जीवन को आगे बढ़ाने में बहुत बड़ा योगदान है. पी वी नरसिम्हा रावजी जब प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने प्रणब मुखर्जीजी को योजना आयोग का प्रमुख बना दिया. थोड़े समय बाद उन्हें केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और विदेश मंत्रालय का कार्य भी सौंपा गया. 

प्रणब मुखर्जी का पारिवारिक जीवन

प्रणब मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के मिराती गांव में 11 दिसम्बर 1935 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ. प्रणब मुखर्जी के पिता का नाम कामदा किंकर मुखर्जी और माता का नाम राजलक्ष्मी मुखर्जी है. इनके पिता कामदा किंकर मुखर्जी एक स्वतंत्रता संग्रामी थे और 1952-64 तक बंगाल विधानसभा के सदस्य भी रहे. इनकी माता गृहणी एवं भारतीय स्वतंत्रता सैनानी थी. घर में राजनैतिक माहोल होने की वजह से बचपन से ही प्रणब मुखर्जी जी का मन राजनीति में आने का था. 

प्रणब दा के पिता कांग्रेस पार्टी के सक्रिय सदस्य थे. प्रणब मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में एमए के साथ साथ कानून की डिग्री भी हासिल की. वे वकील, पत्रकार और प्रोफेसर रह चुके हैं. उन्हें मानद डी.लिट उपाधि भी प्राप्त है. उनकी शादी 13 जुलाई 1957 को सुब्रा मुखर्जी से हुई.


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