घऱ में ही औंधे मुंह गिरे 'राधामोहन'! प्रतिष्ठा की लड़ाई में BJP विधायक ने भाजपा सांसद को किया चारो खाने चित्त, शहर की सरकार से राधामोहन OUT...पवन IN

घऱ में ही औंधे मुंह गिरे 'राधामोहन'! प्रतिष्ठा की लड़ाई में BJP विधायक ने भाजपा सांसद को किया चारो खाने चित्त, शहर की सरकार से राधामोहन OUT...पवन IN

MOTIHARI: मोतिहारी के रण में बीजेपी के स्थानीय सांसद सह पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधामोहन सिंह चारो खाने चित्त हो गए। पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह ने मोतिहारी मेयर की सीट को प्रतिष्ठा का विषय बना लिया था। अपनी बादशाहत बरकरार रखने को लेकर रात-दिन एक कर दिया था। प्रतिष्ठा की इस लड़ाई में भाजपा के कद्दावर नेता अपनी पार्टी के विधायक के हाथों चारो खाने चित्त हो गये. सांसद और विधायक की प्रतिष्ठा की लड़ाई में सासंद औंधे मुंह गिर गये। इस तरह से मोतिहारी के भीष्म पितामह कहे जाने वाले राधामोहन सिंह के हाथ से शहर की सरकार चली गई। 

अग्निपरीक्षा में फेल हुए राधामोहन 

मोतिहारी नगरपालिका चुनाव राधामोहन सिंह के लिए अग्निपरीक्षा के समान था. इस कठिन परीक्षा को पास करने के लिए मोतिहारी के भीष्म पितामह कहे जाने वाले स्थानीय सांसद राधामोहन सिंह ने हर हथकंडे अपनाये. अपनी प्रत्याशी की जीत दिलाने को लेकर तरकश के हर तीर चलाये, लेकिन सब बेकार गया. राधामोहन सिंह के मेयर प्रत्याशी प्रकाश अस्थाना की करारी हार गई। बीजेपी के ढाका से विधायक पवन जायसवाल जिस प्रत्याशी प्रीति गुप्ता के लिए मोर्चा संभाले हुए थे उऩकी बड़ी जीत हुई। पवन जायसवाल के कैंडिडेट प्रीति गुप्ता ने राधामोहन सिंह के उम्मीदवार प्रकाश अस्थाना को 15 हजार से अधिक मतों से हराकर शहर की सरकार पर कब्जा जमा लिया. इस तरह से विधायक पवन जायसवाल ने राधामोहन सिंह को मोतिहारी शहर में ही घेर लिया है। शहर की सरकार पर अपरोक्ष तौर पर राधामोहन सिंह की बजाय पवन जायसवाल का कब्जा हो गया।


विधायक का कद बढ़ा और सांसद का ग्राफ अचानक गिरा   

मोतिहारी की राजनीति में दो बड़े नेता आमने-सामने हैं. एक तरफ राधामोहन सिंह हैं तो दूसरी तरफ पवन जायसवाल। वैसे दोनों के बीच की लड़ाई कोई नई नहीं है। दोनों के बीच यह लड़ाई लंबे समय से जारी है. जिला परिषद अध्यक्ष को लेकर फिर विधान परिषद चुनाव और अब नगरपालिका चुनाव में बीजेपी के सांसद व विधायक आमने-सामने खड़े रहे. राधामोहन सिंह ने अपने प्रत्याशी प्रकाश अस्थाना को जीताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं विधायक पवन जायसवाल ने प्रीति कुमार के पक्ष में जोरदार काम किया. रिजल्ट के बाद विधायक पवन जायसवाल का कद बहुत बढ़ गया. वहीं मोतिहारी के भीष्म पितामह कहे जाने वाले राधामोहन सिंह का ग्राफ धड़ाम हो गया.  मोतिहारी में मेयर की लड़ाई में मिली हार सीधे तौर पर राधामोहन सिंह की हार मानी जा रही है। 

जिप अध्यक्ष चुनाव से शुरू हुई थी विधायक और सांसद की लड़ाई  

बता दें, भाजपा सांसद राधामोहन सिंह ने मोतिहारी जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव व विधान परिषद चुुनाव में अंदर ही अंदर विरोध किया था. पवन जायसवाल की पत्नी को जिप अध्यक्ष नहीं बनने देने में राधामोहन सिंह की बड़ी भूमिका मानी गई थी. तब विधायक पवन जायसवाल ने सार्वजनिक तौर पर ऐलान किया था कि जितना चुमावन उन्होंने दिया है उससे अधिक चुमावन वापस करेंगे। पवन जायसवाल की पत्नी को जिप अध्यक्ष नहीं बनने देने के बाद शहर में पोस्टर लगाये गए थे राधामोहन सिंह को मोतिहारी का भीष्म पितामह बताया गया था। मेयर चुनाव में पवन जायसवाल समर्थक की जीत से राधामोहन सिंह के लिए राजनीतिक मुश्किलें बढ़ने वाली है। 


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