शिक्षा व्यवस्था को लेकर विवादों में घिरा राजभवन, राज्यपाल को पीएमओ ने दिल्ली बुलाया, अटकलें तेज

शिक्षा व्यवस्था को लेकर विवादों में घिरा राजभवन, राज्यपाल को पीएमओ ने दिल्ली बुलाया, अटकलें तेज

PATNA : मगध विश्वविद्यालय, अरबी फारसी विश्वविद्यालय और पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, एक के बाद एक जिस तरह से बिहार के विश्वविद्यालयों में किताबों और उत्तर पुस्तिका की खरीदी को लेकर घोटाले सामने आ रहे हैं और उनका सीधा संबंध राजभवन से जुड़ रहे हैं। उसको लेकर राजभवन पूरी तरह से विवाद में घिर गया है। जहां बिहार सरकार ने अब राजभवन से दूरी बनानी शुरू कर दी है। वहीं इन घटनाओं को लेकर अब बिहार के राज्यपाल फागू चौहान को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से बुलावा आया है।  राजभवन के एक उच्च अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है और बताया है कि राज्यपाल आज दिल्ली रवाना होंगे। बिहार के राज्यपाल फागू चौहान के अचानक देश की राजधानी दिल्ली जाने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई प्रकार की चर्चा शुरू हो गई है। 

एमयू वीसी के यहां छापेमारी से शुरू हुआ विवाद

राज्यपाल को पीएमओ से बुलावे को हाल के दिनों में जिस तरह से विश्वविद्यालयों में गड़बड़ी सामने आई है और उसके बाद भी राजभवन के किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं किए जाने से जोड़ा जा रहा है। पिछले सप्ताह ही एमयू के वीसी के घर और दूसरे ठिकानों से करोड़ों की अवैध संपत्ति बरामद किया गया था. लेकिन उन्हे पद से हटाने की जगह राजभवन ने सिर्फ एक माह की छुट्टी पर भेज दिया। जबकि राज्य सरकार उन्हें हटाने की मांग कर चुकी है। 

इसी तरह, मौलाना महजरुल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय कुलपति ने भी मुख्यमंत्री और राज्यपाल को लैटर लिखकर उत्तर पुस्तिका में खरीदी को लेकर प्रभारी कुलपति पर सीधे सीधे भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, लेकिन इसके बाद भी राजभवन ने चुप्पी साधे रखी। यहां तक कि जिस प्रभारी कुलपति पर आरोप लगे, उन्हें खुद राज्यपाल मंगलवार को बेस्ट वीसी के अवार्ड से सम्मानित कर रहे थे। इन कारणों के चलते राज्य सरकार और राजभवन में दूरी बनी है। 

इधर, राज्यपाल फागू चौहान को दिल्ली बुलाए जाने पर यह चर्चा होने लगी है कि मगध विश्वविद्यालय के कुलपति राजेंद्र प्रसाद पर भ्रष्टाचार के लगे आरोपों के बावजूद उन्हें पद से नहीं हटाया जाना भी एक कारण हो सकता है। वहीं हाल में मौलाना महजरुल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय में टेंडर में घालमेल के बावजूद तत्कालीन प्रभारी कुलपति के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने के बजाय उन्हें अवार्ड देना भी कारण हो सकता है। इन कारणों के चलते राज्य सरकार और राजभवन में दूरी बनी है। 

बुलाने के बाद भी नहीं गए शिक्षा मंत्री

जानकारी के मुताबिक राजभवन में चांसलर अवार्ड समारोह (Chancellor Award ceremony) का आयोजन किया गया था. जिसमें 5 शिक्षकों, 6 विद्यार्थियों, 2 महाविद्यालयों के साथ ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एसपी सिंह को राज्यपाल फागू चौहान ने सम्मानित किया.इस कार्यक्रम में बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी को भी शामिल होना था, लेकिन कार्यक्रम से उन्होंने किनारा कर लिया. और न ही शिक्षा विभाग की ओर से कोई अधिकारी पहुंचा. 

राजभवन और बिहार की नीतीश सरकार के बीच दूरियां दिखने लगी है. प्रदेश के विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार की मिल रही शिकायतें इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है. जिस पर पीएमओ भी नजर लगाए हुए है। बिहार में अभी जिस तरह के राजनीतिक हालात हैं, उसके बाद पीएमओ कभी नहीं चाहेगा कि विपक्ष को किसी प्रकार का मुद्दा दे दिया जाए। खासकर बात जब बिहार की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा हो, जिनसे युवाओं का सीधा कनेक्शन है। माना जा रहा  है कि यही कारण है कि राज्यपाल को आज पीएमओ ने दिल्ली बुलाया है।


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