सीओ के पक्ष में खड़ा हुआ राजस्व विभाग, कहा- जान-बूझकर कई विभाग जमीनों का करवाते हैं अतिक्रमण

सीओ के पक्ष में खड़ा हुआ राजस्व विभाग, कहा- जान-बूझकर कई विभाग जमीनों का करवाते हैं अतिक्रमण

डेस्क... सरकारी जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जा से परेशान होकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अन्य सरकारी विभागों को चेताया है। विभाग के अपर सचिव विवेक सिंह ने कहा कि दूसरे विभाग पहले तो अपनी जमीनों पर अतिक्रमण को बढ़ावा देते हैं और फिर उसका ठीकरा सीओ पर फोड़ते हैं। समीक्षा बैठक के दौरान अपर सचिव ने यहां तक कहा दिया कि कई विभाग अपनी जमीन पर जान-बूझकर अतिक्रमण होने देते हैं या सक्रिय रूप से अतिक्रमण को बढ़ावा देते हैं। राजधानी में कई जल स्रोतो एवं जल निकासी के साधनों पर मकान या दुकान के साथ-साथ व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी पाए गए हैं। 

इनमें से कई अतिक्रमण उन जमीनों पर भी हैं जो किसी न किसी सरकारी विभाग को आवंटित हैं। विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने मंगलवार को सरकारी भूमि के अतिक्रमण के मामलों की समीक्षा की और लोक भूमि अतिक्रमण को खाली कराने के लिए अंचल अधिकारियों को आदेश दिया। बता दें कि सरकारी विभागों की जमीन पर अतिक्रमण के 11499 मामले लंबित हैं। 

 अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जिला पदाधिकारियों को पत्र लिख कर हरेक सरकारी विभाग से एक जिला स्तरीय नोडल पदाधिकारी नियुक्त करने का अनुरोध किया गया था। समीक्षा में पाया गया कि इस दिशा में विशेष प्रगति नहीं हुई है। हालांकि संबंधित विभाग की जमीन पर अगर कोई अतिक्रमण है, तो उसे खाली कराने के लिए अंचलाधिकारी के न्यायालय में अतिक्रमण वाद दायर करने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग के नोडल पदाधिकारी की ही है। सरकारी भूमि जिनमें मुख्य रूप से गैरमजरूआ आम, गैरमजरूआ खास, कैसरे हिंद एवं खास महल शामिल है इसके अलावा बड़ी संख्या में विभिन्न विभागों की जमीन पर अतिक्रमण की बात सामने आई है। इन अतिक्रमण की वजह से लोकहित एवं कार्यहित बाधित हो रहा है।


राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने बीते 28 अक्टूबर को ही सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के संबंध में राज्य के सभी 9 कमिश्नरों और 38 जिलाधिकारियों को कड़ा पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की जिलावार निश्चय यात्रा के दौरान विभिन्न जिलों में लोक शिकायत निवारण कानून के अन्तर्गत दायर वादों में सर्वाधिक मामले लोक भूमि पर अतिक्रमण से संबंधित हैं। कई मामलों में हाई कोर्ट द्वारा लोक भूमि से अतिक्रमण हटाये जाने का आदेश भी दिया गया है। इस पर तत्काल कठोर कार्रवाई करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि राज्य के अंचल अधिकारियों के पास अन्य विभागों के अतिक्रमित जमीन का ब्योरा उपलब्ध नहीं रहने के कारण दूसरे विभागों की जमीन से अतिक्रमण हटाये जाने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। वैसी स्थिति में जिला स्तरीय पदाधिकारी का दायित्व बनता है कि वह अतिक्रमित जमीन से संबंधित स्वामित्व के प्रमाण के साथ अंचल अधिकारी के न्यायालय में अतिक्रमणवाद दायर करें। पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा निर्गत निर्देशों और पत्रों के आलोक में की की जाने वाली अपेक्षित कार्रवाई की मॉनिटरिंग सही तरीके से नहीं हो रही है।

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