मरणोपरांत पद्मभूषण से सम्मानित हुए रामविलास पासवान, राष्ट्रपति के हाथों सम्मान लेने पहुंचे पुत्र चिराग पासवान

मरणोपरांत पद्मभूषण से सम्मानित हुए रामविलास पासवान, राष्ट्रपति के हाथों सम्मान लेने पहुंचे पुत्र चिराग पासवान

NEW DELHI / PATNA : लोकजनशक्ति पार्टी के संस्थापक और भारत के बड़े राजनेताओं में शामिल स्व. रामविलास पासवान को मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान दिया गया है। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान दिया गया। पिता के निधन के पश्चात यह पुरस्कार उनके बेटे चिराग पासवान ने ग्रहण किया। इस दौरान पिता को मिले पुरस्कार को पाकर चिराग भावुक नजर आए। बता दें कि रामविलास पासवान को यह पुरस्कार 2020 के लिए दिया गया है। उन्हें यह पुरस्कार देने की घोषणा इस साल के आरंभ में की गई थी।

रामविलास पासवान को यह पुरस्कार जनसेवा के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए पासवान को यह सम्‍मान प्रदान किया. राम विलास पासवान ने भारतीय राजनीति में एक लम्बी लाइन खिंची. बिहार के एक छोटे से गाँव के दलित परिवार में पैदा हुए पासवान देश की राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे.उन्होंने हमेशा केंद्र की राजनीति की.केंद्र सरकार में वे लंबे समय तक मंत्री रहे. अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह, नरेंद्र मोदी के साथ ही छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया. सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से उनके निकट संबंध रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी उनकी अच्‍छी मित्रता रही.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राम विलास पासवान के बीच मित्रता के संबंध मजबूत होने की बड़ी वजह चिराग पासवान बने थे. दरअसल, जब भाजपा ने प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी का नाम आगे किया तब राम विलास पासवान, कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार में मंत्री थे, जिसका नेतृत्‍व मनमोहन सिंह कर रहे थे।

पिछले साल हो गया था निधन

लगभग 50 साल के भी अधिक समय तक सक्रिय राजनीति से जुड़े रहे रामविलास पासवान बिहार सहित देश में दलित वर्ग के सबसे बड़े नेता के रूप में माना जाता रहा है। बिहार की राजनीति में उनका सक्रिय योगदान रहा है। लालू, नीतीश के साथ उनकी सफल जोड़ी रही है। 

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