ऑडियो टेप में घूस की रेट - एडीएसओ को 25 हजार, एसडीओ को 50 हजार, जिला को 25 हजार

ऑडियो टेप में घूस की रेट - एडीएसओ को 25 हजार, एसडीओ को 50 हजार, जिला को 25 हजार

PATNA : बिहार में घूसखोरी के लिए रेट तय है। न्यूज फॉर नेशन को एक ऑडियो टेप मिला है जिसमें इस रेट का जिक्र है। जनवितरण के अनाज की कालाबाजारी के लिए एडीएसओ को 25 हजार, एसडीओ को 50 हजार और जिला ऑफिस को 25 हजार की रकम देनी पड़ती है। हालांकि न्यूज फॉर नेशन इस ऑडियो क्लिप की सत्यता का दावा नहीं करता लेकिन इसमें जो बातचीत है वो बिहार में भ्रष्टाचार के भयावह रूप को बताने के लिए काफी है।

घटनाक्रम पटना जिले के नौबतपुर प्रखंड से जुड़ा है। आरोपों के मुताबिक पहले इस प्रखंड में डीलर जनवितरण का अनाज अभय और मुन्ना की देखरेख में उठाते थे। अनाज के उठाव के बदले डीलरों को रिश्वत के रूप एक तय रकम देनी होती थी। अभय और मुन्ना ये पैसा कलेक्शन करते थे। बाद में इस अवैध वसूली के लिए मनोज सिंह ने डील की। ऑडियो टेप में नौबतपुर के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और इस इलाके के दबंग मनोज सिंह के बीच बातचीत है।

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 हां, एमओ साहेब, मुन्ना- अभय बोल रहे हैं कि अब कलेक्शन नहीं करेंगे ?

अफसर- जी, वो लोग बोल रहा है हम न करेंगे।

कोई बात नहीं है, मेरे पास आदमी हैं, उ करेगा। अच्छा बात है।

आपका कमीशन है उसमें कोई त्रुटि न करेंगे। जहां जो बनता है ऊ मिलेगा। आप ऊपर जैसे मैनेज करते हैं, करिए, उसमें कोई कमी नहीं होगी।  ऊपर एडीएसओ को जितना देते हैं, वह मिलेगा।   एडीएम सप्लाई का जो बंधा है, मिलेगा। आपके माध्यम से सब जगह मिलेगा।

हम कलेक्शन करा लेंगे। लेकिन पहिले एक बात, हमको सब डीलर का सूची चाहिए, 70-72 सभी का। दूसरा ये कि सब डीलर को कह दीजिए कि मुन्ना को कलेक्शन नहीं देना है।

अफसर- जी ,जी

हम कलेक्शन करा लेंगे। ठीक न

अफसर- जी, जी

आपके पास सूची है, सबको कह दीजिए

अफसर- हां, हां कोई बात न

एडीएसओ को कितना जाता है कमीशन ?

अफसर-  25, जी

50 एसडीओ को

जिला को कितना ?

 अफसर – 25

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मोटामोटी मान के चलिए कि एक लाख। आप कमाइए सर, आपसे हमको कोई दिक्कत नहीं है। हमको मेन दिक्कत अभय और मुन्ना से है।

आपके कमीशन या कोई चीज में कोई कमी नहीं होगा।



अफसर- जी, जी

आप अपना ऊपर वाला मैनेज कर के रखिए। आपको लोग कलेक्शन कर के दे देगा। अपना ऊपर मैनेज रखिए। आपका है जो आपको मिल जाएगा, ऊपर जो जाता है ऊ उपर जाएगा। साहेब को जो जाता है ,साहेब को जाएगा। इसके बाद जो बचेगा, हम मलोग दू रुपिया रखेंगे।

अफसर- हां, ठीक है।

इस बातचीत को सुन कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि गरीबों के अनाज को कालाबाजार में बेच कर अफसर और दलाल किस तरह मालामाल हो रहे हैं।

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