बिहार के इस शहर में छठ पूजा को जलता है रावण, समाज की बुराई खत्म करने का दिया जाता है सन्देश

बिहार के इस शहर में छठ पूजा को जलता है रावण, समाज की बुराई खत्म करने का दिया जाता है सन्देश

MUZAFFARPUR : आम तौर पर देश के अलग अलग हिस्सों में विजयादशमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इसी दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर रावण का पुतला दहना किया जाता है। लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर में विजयादशमी के बजाय छठ पूजा के मौके पर रावण का पुतला जलाया जाता है। 


यहाँ छठ पूजा के दूसरी अर्घ्य के दिन यानी छठ पूजा के अंतिम दिन रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। जिले के  साहू पोखर घाट पर छठ पर्व और पुतला दहन आयोजन कराने वाले भारतीय सेवा दल के अध्यक्ष विक्रम सर्राफ ने बताया की विगत 16 साल से साहू पोखर घाट पर सुबह के अर्घ्य वक्त रावण दहन की परंपरा है। इस प्रथा का निर्वहन साहू रोड के लोग लंबे समय से करते आ रहे हैं। 

उन्होंने कहा की इसके पीछे का उद्देश्य यह है की रावण बुराई का प्रतीक है। रावण दहन के साथ हम व्रतियों एवं उनके परिजनों को अपने भीतर के बुराई रूपी रावण का दहन करने का संदेश देते हैं। इस बार का रावण दहेज रूपी दंश और बाल विवाह का प्रतीक होगा। दहेज लेने देने वालों के लिए हम रावण जला कर यह कड़ा संदेश देंगे की आज के समाज में दहेज मांगने वाले रावण से कम नहीं है। 

उन्होंने बताया की इस कार्यक्रम को देखने के लिए घाट पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा होती है। जहाँ रावण का पुतला जलाकर समाज की बुराई खत्म करने का सन्देश दिया जाता है। 


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