पार्टी से ज्यादा खुद के परिवार के लिए संपत्ति जुटा रहे थे आरसीपी सिंह, नौ साल में खरीदे 58 प्लॉट, पार्टी ने पूछा - कहां से आए पैसे

पार्टी से ज्यादा खुद के परिवार के लिए संपत्ति जुटा रहे थे आरसीपी सिंह, नौ साल में खरीदे 58 प्लॉट, पार्टी ने पूछा - कहां से आए पैसे

PATNA : जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रहे आरसीपी सिंह अब बुरी तरह से घिर गए हैं और कभी भी उनके खिलाफ पार्टी कोई बड़ी कार्रवाई कर सकती है।  कार्रवाई का आधार उनकी तथा घर वालों की हाल की संपत्ति है। इस संपत्ति का ब्योरा जदयू के ही नेताओं ने जुटाई है। इसके अनुसार, आरसीपी व उनके घर वालों ने 2013 से अब तक नालंदा जिला के सिर्फ दो प्रखंड अस्थावां व इस्लामपुर में करीब 40 बीघा जमीन खरीदी है। कई और जिलों में भी उनकी संपत्ति होने की बात है।

 पत्नी और दोनों पुत्रियों के नाम पर कई जमीन 

खरीदी गई ज्यादातर जमीनें आरसीपी सिंह की पत्नी (गिरजा सिंह) और दोनों पुत्रियों (लिपि सिंह, लता सिंह) के नाम पर है। एक आरोप यह भी है कि आरसीपी ने खासकर 2016 के अपने चुनावी हलफनामे में इसका जिक्र नहीं किया है। 4 सितंबर 2014 एवं 15 सितंबर 2014 को सिलाव (नालंदा) के बिशेश्वर साव ने 2 प्लॉट खरीदे। और 3 दिन बाद यानी 18 सितंबर को ये दोनों प्लॉट लिपि सिंह व लता सिंह के नाम बेच दिया। ऐसे 2 और मामले हैं, जिसमें 6 दिन और 8 महीने में दूसरे से खरीदी गई जमीनों को खरीदने वाले ने लिपि सिंह, लता सिंह और लिपि सिंह को जमीन बेच दी। कुल 35 पन्नों में जमीन की खरीद और इससे जुड़े दूसरे विवरण हैं। इस्लामपुर (हिलसा) अंचल के सैफाबाद मौजा में 12 तथा केवाली अंचल में 12 प्लॉट खरीदे गए। यह खरीद 2013 से 2016 के दौरान हुई। ये प्लॉट लिपि सिंह व लता सिंह के नाम पर खरीदे गए। 28 अप्रैल 2014 को चरकावां (नीमचक बथानी, गया) के नरेश प्रसाद सिंह ने बेलधर बिगहा (छबीलापुर, नालंदा) के धर्मेंद्र कुमार को दान में जमीन दी। बाद में धर्मेंद्र कुमार ने यही जमीन लिपि सिंह व लता सिंह के नाम बेच दी। 

अस्थावां में खरीदे 34 प्लॉट

जदयू के दस्तावेज के अनुसार, अस्थावां के शेरपुर मालती मौजा में 33 प्लॉट की खरीद हुई। इनमें 4 प्लॉट 2011 व 2013 में लता सिंह व लिपि सिंह के नाम पर खरीदे गए। पिता के रूप में आरसीपी सिंह का नाम है। बाकी 12 प्लॉट गिरजा सिंह और 18 प्लॉट लता सिंह के नाम पर खरीदे गए। महमदपुर में 2015 में एक प्लॉट गिरजा सिंह के नाम पर खरीदा गया। 2011 में 2, 2013 में 2, 2014 में 5, 2015 में 6, 2017 में 1, 2018 में 3, 2019 में 4, 2020 में 3, 2021 में 6 तथा 2022 में 2 प्लॉट खरीदे गए।


प्रदेश अध्यक्ष ने पूछे सवाल
जदयू सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने आरसीपी को पत्र भी लिखा है-’नालंदा जिला जदयू के दो साथियों का साक्ष्य के साथ परिवाद पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें उल्लेख है कि अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार आपके और आपके परिवार के नाम से वर्ष 2013 से 2022 तक अकूत संपत्ति निबंधित कराई गई है। इसमें कई प्रकार की अनियमितता दृष्टिगोचर होती हैं। आप लंबे समय तक दल के सर्वमान्य नेता नीतीश कुमार के साथ अधिकारी एवं राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहे हैं। आपको, हमारे माननीय नेता ने दो बार राज्यसभा का सदस्य, पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव (संगठन), राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा केंद्र में मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर, पूर्ण विश्वास एवं भरोसा के साथ दिया। 

आप इस तथ्य से भी अवगत हैं कि माननीय नेता, भ्रष्टाचार के जीरो टॉलरेंस पर काम करते रहे हैं और इतने लंबे सार्वजनिक जीवन के बावजूद उन पर कभी दाग नहीं लगा और न उन्होंने कोई संपत्ति बनाई। पार्टी आपसे अपेक्षा करती है कि इस परिवाद के बिंदुओं पर बिंदुवार अपनी स्पष्ट राय से पार्टी को तत्काल अवगत कराएंगे।’

अपने पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई करनेवाली पहली पार्टी

पार्टी ने इसे भ्रष्टाचार के मोर्चे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के खिलाफ माना है। अपने ही पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ जांच करने और उनसे भ्रष्टाचार संबंधी सवाल-जवाब करने वाली जदयू हालिया वर्षों में संभवत: देश की पहली पार्टी है। 

वे छह सवालजो आरसीपी सिंह से पूछे थे... लेकिन कोई जवाब नहीं दिया


 क्या नालंदा के सिर्फ दो प्रखंड अस्थावां व इस्लामपुर में 2013 से अब तक करीब 40 बीघा जमीन आपने खरीदी है?
 आपने क्या वाजिब आमदनी के बूते यह संपत्ति बनाई है? चूंकि पार्टी आपकी इस खरीद को अनियमितता के दायरे में लाई हुई है।
 ज्यादातर जमीनें आपकी पत्नी और दोनों पुत्रियों के नाम पर हैं। आपने 2016 के चुनावी हलफनामे में इसका जिक्र नहीं किया। क्यों?
 कुछ ऐसी जमीनें भी खरीदने की बात है, जो किसी ने किसी को दान दी थी और दान लेने वाले ने आपको बेच दी?
 किसी एक ने दूसरे से जमीन खरीदी और फिर कुछ दिनों में आपके दोनों बेटियों को क्यों बेच दी?
 कई सम्पत्तियों की खरीद के वक्त आपकी पुत्री लिपि सिंह अविवाहित थीं। दस्तावेज में आपकी सिर्फ आपकी पत्नी का नाम है। क्यों?

 
 

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