संजय जायसवाल सूरज पर थूकने का काम नहीं करें, नीतीश कुमार पर सवाल उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांके

संजय जायसवाल सूरज पर थूकने का काम नहीं करें, नीतीश कुमार पर सवाल उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांके

पटना. जदयू के वरिष्ठ नेता अरविंद कुमार सिंह उर्फ़ छोटू ने भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल को नसीहत देते हुए कहा है कि जायसवाल का बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाना कुछ उसी तरह है जैसे सूरज पर थूकना. जायसवाल को पता होना चाहिए कि सरकार का कोई भी निर्णय मंत्रिमंडल की सहमति से होता है. बिहार में एनडीए की सरकार है जिसके हर निर्णय और कार्य में जदयू के साथ ही भाजपा भी बराबर की साझीदार है. ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को लेकर जायसवाल का जदयू से सवाल करना गठबंधन की मूल भावना पर सवाल करना है. 

छोटू सिंह ने कहा कि जायसवाल एक अनुभवी और वरिष्ठ नेता होने के बाद भी अक्सर हल्की बातें करते हैं. एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा खुले दिल से सीएम नीतीश के सुशासन की सराहना करते हैं. वहीं दूसरी ओर जायसवाल जैसे नेता नीतीश सरकार पर सवाल कर अपने ही शीर्ष नेता मोदी, शाह और नड्डा को कठघरे में खड़े करते हैं. 

उन्होंने कहा कि अगर शिक्षा विभाग जदयू के कोटे में है इसलिए जायसवाल टिप्पणी करते हैं तो क्या जिन विभागों का जिम्मा भाजपा के मंत्रियों के पास है वह नीतीश सरकार से अलग के विभाग हैं? नीतीश सरकार हमेशा ही समेकित और सर्वांगींन विकास करती है. वर्ष 2005 में नीतीश कुमार के सीएम बनने के बाद उनकी ही दूरदर्शी सोच से शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया. आज बेटियां साइकिल चलाकर स्कूल जाती हैं. राज्य में 10वीं और 12वीं का रिजल्ट रिकॉर्ड समय में जारी किया जा रहा है. उच्च शिक्षा के लिए नीतीश सरकार 4 लाख रुपए का सहयोग दे रही है. अगर उच्च शिक्षा को लेकर जायसवाल को कोई शिकायत है तो उन्हें इस पर राज्यपाल से बात करनी चाहिए जो विश्विद्यालयों के कुलाधिपति हैं. राज्यपाल के जिम्मे ही उच्च शिक्षा की चुनौतियों को दूर करने का जिम्मा है लेकिन जायसवाल को यह नैतिक समझ नहीं है. 

अग्निपथ योजना पर जायसवाल को घेरते हुए उन्होंने कहा कि आशंकित और असुरक्षित भविष्य से परेशान युवाओं का आक्रोश जायसवाल नहीं देख पा रहे हैं. लगातार कम होती वैकेंसी को लेकर युवाओं की चिंताओं को समझने में जयसवाल असफल हैं. लाखों युवाओ की स्वप्रेरित भीड़ का सड़क पर उतर जाना अग्निपथ के खिलाफ युवओं के गुस्से को स्पष्ट दिखाता है. उनकी समस्याओं का समाधान करने के बदले जयसवाल युवाओं को दंगाई और बिहार प्रशासन पर सवाल का करते हैं. जदयू के शीर्ष नेताओं ने इसी कारण जायसवाल की बातों को तरजीह नहीं देने की बात कही. 

बिहार को बीमारू राज्य से सुशासन राज में तब्दील करने वाले नीतीश सरकार की दक्षता खुद पीएम मोदी दर्जनों बार सराह चुके हैं. ऐसे में जायसवाल की बातों का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता है. वे जनाधारविहीन नेता हैं.  उन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए.


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