सरकार के दावे झूठे, कैमुर में नहीं हो रही धान की खरीदारी

सरकार के दावे झूठे, कैमुर में नहीं हो रही धान की खरीदारी

कैमूर। जिले के भभुआ प्रखंड के बेतरि पैक्स पर किसानों की जगह बिचौलियों के धानों की खरीदारी धड़ल्ले से जारी है। सरकार कहती है कि हम किसानों का धान समर्थन मूल्य 1868 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद रहे हैं। यहां तक की बेतरी पैक्स पर अब तक कागजों में 32 किसानों से लगभग साढे तीन सौ मीट्रिक टन धान खरीदारी करने का आंकड़ा भी जारी कर दिया गया। लेकिन बेतरी गांव के किसान इस खरीदारी के आंकड़े को झूठा बतला रहे हैं। जब बेतरी पैक्स गोदाम पर पहुंचा गया तो गोदाम बंद मिला। ना ही बैनर, पोस्टर, और ना कोई व्यक्ति मिला जो इस खरीदारी में शामिल हों। 

लेकिन, पैक्स अध्यक्ष के बन रहे मिल के पास धान का ढेर खुले आसमान के नीचे दिखा, जिसे पैक्स अध्यक्ष किसानों से खरीदा गया धान बता रहे हैं तो वहीं प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी उस खरीदे धान को किसानों का नहीं बता रहे हैं। धान की खरीदारी में पैक्स अध्यक्ष और प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी की बातों में काफी असमानता देखने को मिली। धान खरीद पर अब आप इन दोनों की बातों को सुनकर खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि कितना किसानों के प्रति यह लोग जिम्मेदार हैं और किसानों के धान की खरीद हो रही है या बिचौलियों की। 


बंद मिलता है गोदाम

किसान बताते हैं कि हम लोग अपना धान पैक्स में देने के लिए कई बार गोदाम पर गए लेकिन गोदाम भी बंद मिलता है। पैक्स अध्यक्ष खरीदारी का सिर्फ आश्वासन देते हैं लेकिन खरीदारी समय पर नहीं हो पा रही है। किसानों की जगह बिचौलियों को धान खरीदा जा रहा है। किसानों से प्रति बोरी 2 से 5 केजी धान एक्स्ट्रा लिया जाता है और खर्चा के नाम पर सौ से डेढ़ सौ रुपया उनसे अधिकारियों को देने के नाम पर लिया जाता है। हम लोग अपना धान खेत से कटाई करा कर अपने घरों के पास रखकर तिरपाल से ढक कर उसको टैक्स में भेजने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन अभी तक पैक्स द्वारा हम लोग का धान की खरीदारी नहीं हो रहा है ।

जांच कराने की कही बात

वहीं जिला सहकारिता पदाधिकारी बताते हैं हम लोग किसानों से धान की खरीदारी कर रहे हैं। अगर कोई आरोप लगाता है तो गलत है। हमारे सभी पैक्स के गोदाम पर बैनर पोस्टर लगा हुआ है। खुले में धान की खरीदारी नहीं होगी। उसको गोदाम में रखा जाएगा। हम जांच करवाते हैं।

कुछ दिन पहले ही राज्य के कृषि मंत्री ने कैमुर के किसानों की तारीफ करते हुए कहा था कि यहां के किसानों को मंडियों में धान बेचने की जरुरत नहीं पड़ती है, क्योंकि खरीदार सीधे खेतों से ही सारी फसल खरीद लेते हैं। कृषि मंत्री का बयान काफी हद तक किसानों के आरोप को सही साबित करता नजर आ रहा है।

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